Monday, November 2, 2020

इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

इस चुनाव से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है


चुनाव है तो चुनने का बहाना कोई ढूँढे

पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है


भेड़ चाल की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो

ता-हद्द-ए-नज़र एक उफ़ान सा क्यूँ है


क्या कोई नई बात नज़र आती है फल में 

जो बोया वही पाया हैरान सा क्यूँ है


(शहरयार से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 2 नवम्बर 2020 । सिएटल


रफ़ीक = दोस्त

https://youtu.be/XwtzYGxSWl0


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