Saturday, October 1, 2022

वो ही जोक भेजता है

वो ही जोक भेजता है 

वो ही शोक व्यक्त करता है 

वो ही डायबिटीज़ उखाड़ फेंकता है

वो ही ज्ञान बांटता है 

वो ही है जो दुनिया की तमाम ख़बरों पे अपनी नब्ज़ रखता है 


कैसे कोई इतना 

भंडार सम्हाल लेता है 

एक अंगूठे के बल पे 

दुर्गा के हज़ार हाथों से 

ज़्यादा हमें दान देता है 


वो ही एक कर्मयोगी है

जो मौत और जश्न को

एक ही आँख से देखता है 

एक ही साँस में 

दोनों पे टिप्पणी करता है 

एक में ओम शांति 

तो दूजे में लख बधाईयाँ कहता है 


प्रभात भी सुप्रभात 

उसके बिना न होती है 

रात्रि भी शुभरात्रि

उसके कहे बिना न होती है 


कब कौन सा त्योहार है

उसके कहने ही से आता है 

वह जो कह दे तो हमें

अपनी संस्कृति पे गर्व होता है 

वह जो कह दे तो 

शर्म से डूब के मरना होता है 


ऐसे कर्मवीर का

झूठ भी हमें सच लगता है 

ये ही तो है जिससे 

दुनिया जहान का पता चलता है 


ये न हो तो

कितने दिग्गज 

बिना हमारे आँसू 

बहाए निकल जाते 

वो कितना किसके लिए

छोड़ गए यह भी न जान पाते 


राहुल उपाध्याय । 30 सितम्बर 2022 । सिएटल 






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