Wednesday, December 9, 2020

का करूँ सजनी

का करूँ सजनी, आए न वैक्सीन 

लूट रही हैं पिया परदेसी कम्पनियाँ


जब भी कोई, टीवी पे आए, मनवा मोरा भागे

देखो कहीं, झूठे फिर से, दे दे ये न वादे

ये मतवारे लोग हमारे फूले न समाए

भारत है आगे, पीछे सारी दुनिया 


भोर भई और, साँझ ढली रे, समय ने ली अंगड़ाई

ये जग सारा, जग से हारा, कोई ख़बर न आई 

मैं घबराऊँ, डर डर जाऊँ

आए वो न आए

मास्क लगाए कहाँ खोए हो कन्हैय्या


(अमित खन्ना से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 9 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/VHB4K0GgVs4


Monday, December 7, 2020

डायरी

अच्छा लगता है 

जब वो मेरे सारे मैसेज डिलीट कर देती है 

और मुझसे दोबारा बताने को कहती है 

उस फ़िल्म का नाम जिसे मैंने 

कल ही तो बताया था


अच्छा लगता है 

जब वो कोई आहट होने पर 

बात करते-करते फ़ोन काट देती है


अच्छा लगता है 

जब वो मुझसे घंटो-घंटो बातें करती है 

शेयर करती है 

अपनी हर छोटी-बड़ी ख़ुशी 

अपने सुख-दुख के पल

अपनी आशा-निराशा 


अच्छा लगता है 

कि वो मुझे डायरी समझती है

सहज रहती है 

महफ़ूज़ महसूस करती है

अपना समझती है


अच्छा लगता है

जब वो लिखती है कुछ अच्छा 

और मैं जवाब नहीं दे पाता हूँ 

यह सोचकर कि

ग़लती से कोई पढ़ न ले

और जो मैं कहना चाहता हूँ 

उसे हुबहू वैसा ही समझ ले


राहुल उपाध्याय । 7 दिसम्बर 2020 । सिएटल 


Saturday, December 5, 2020

आज पुरानी बातों से

आज पुरानी बातों से

कोई मुझे बकवास न दे

नर्क की झूठी दलील न दे

स्वर्ग का सुनहरा ख़्वाब न दे


बीते दिनों की याद थी जिनमें

मैं वो तराने भूल चुका

आज नई मंज़िल है मेरी

कल के ठिकाने भूल चुका

न वो दिल न सनम

न वो दीन-धरम

अब दूर हूँ सारे गुनाहों से


टूट चुके सब नाम के बंधन

आज कोई ज़ंजीर नहीं

शीशा-ए-दिल में पाखंडों की

आज कोई तस्वीर नहीं

अब शाद हूँ मैं

आज़ाद हूँ मैं

कुछ काम नहीं सलाख़ों से


जीवन बदला दुनिया बदली

मन को अनोखा ज्ञान मिला

आज मुझे अपने ही दिल में

एक नया इन्सान मिला

पहुँचा हूँ वहाँ

नहीं दूर जहाँ

अंजाम भी मेरी निगाहों से


(शकील बदायूनी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 5 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/hfMBnx8yZRI


डॉक्टरों से तुम ये मत पूछो


डॉक्टरों से तुम ये मत पूछो 

डॉक्टरों पे क्या गुज़री है

हाँ उनके दिलों से ये पूछो, 

अरमानों पे क्या गुज़री है


औरों को बचाते रहते हैं

और ख़ुद बिचारे मर जाते हैं

ये जीने वाले क्या जाने

शमशानों पे क्या गुज़री है


मास्क न लगाया मरीज़ों ने

डॉक्टर सब पहन कर बैठा

तुम घर बैठे क्या जानो

अस्पतालों पे क्या गुज़री है


(क़मर जलालाबादी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 2 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/opYzmU2Ujyk


Friday, December 4, 2020

वैक्सीन की बात चली तो


कुछ की जेबें भरेंगी 

बाक़ी सब आह भरेंगे 

वैक्सीन की बात चली तो

शक-शुबहा साथ चलेंगे

           

कहीं इसकी है वैक्सीन 

कहीं उसकी है वैक्सीन

कहाँ तो एक नहीं थी

अब हज़ारों हैं वैक्सीन 

कौन सी अच्छी-बुरी है

कैसे हम जाँच लेंगे


जैसे अब तक बचे हैं

वैसे बचते रहेंगे

हाथ धोते रहे हैं

हाथ धोते रहेंगे

वैक्सीन की क्या ज़रूरत 

अक़्ल से काम लेंगे 


हर तरफ़ बाज़ार नरम है

इलाज का बाज़ार गरम है

इनका है क्या भरोसा

इनका न ईमान-धरम है

मरीज़ मरता है तो मर जाए

ये तो नोट छाप लेंगे


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 3 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/BtvcArRUOq4


Wednesday, December 2, 2020

कौन हो तुम

कौन हो तुम?


वह जो मुझसे बड़ी थी

वह जो मुझसे छोटी थी

वह जो स्कूल में थी

वह जो कॉलेज में थी

वह जो देस में थी

वह जो परदेस में थी

वह जो साथ-साथ बढ़ी 

और वह भी जो यूँ ही 

सर-ए-राह चलते-चलते मिली


चाहे रहा साथ पल-दो-पल का

या आठ दिन का

या साल भर का

तुम सबकी सब भली थीं 

चल कर साथ चार क़दम 

कभी आ गई तुम्हारी 

तो कभी मेरी गली थी


तुम याद नहीं 

तुम साँस नहीं 

तुम सुबह नहीं 

तुम शाम नहीं 

तुम धूप नहीं 

तुम छाँव नहीं 

जो आतीं-जातीं रहतीं हैं


तुम एक अहसास हो

जिसकी कोई पहचान नहीं 

जिसका कोई निर्धारित 

समय, अवधि या काल नहीं 


तुम हर उस रंग में हो

जो तुम्हें-मुझे पसन्द है


तुम हर प्रेम गीत में हो

तुम हर मधुर धुन में हो


जब तक मैं हूँ 

तब तक तुम हो

जहाँ-जहाँ मैं हूँ 

वहाँ-वहाँ तुम हो


और तुम हो

इसका पता

सबके सवाल दे रहे हैं


कौन हो तुम?


राहुल उपाध्याय । 2 दिसम्बर 2020 । सिएटल 



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छीनेगा नहीं

इतने सारे फ़ोटो में 

तेरा-मेरा कोई फ़ोटो नहीं 


तू थी तो हयात थी 

तू थी तो दिन था 

तू थी तो रात थी 


तुझसे मिला 

तो आँखों से मिला 

न गले लगा 

न हाथ छुआ 


तू ज़हन में है 

अलबम में नहीं 

तू नस-नस में है 

पिक्सल में नहीं 

तू निरंतर है 

वाई फ़ाई की मोहताज नहीं 


गूगल चाहे सबको डिलीट कर दे 

मुझसे तुझे कोई छीनेगा नहीं


राहुल उपाध्याय । 2 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

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