Sunday, August 15, 2021

पहेली 2021/08/15


इतवारी पहेली:


जब बचा कहीं कोई ### #

परायों को किया शुरू ####


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 22 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 15 अगस्त 2021 । सिएटल















Saturday, August 14, 2021

मैं तुझसे दूर, तेरे साथ

मैं 

तुझसे दूर

तेरे साथ 

इस अपार्टमेंट में रहता हूँ 


क्या है मेरा

क्या है तेरा

सब सोचता मैं रहता हूँ 


ये स्वेटर-जैकेट 

ये वॉकर-घड़ी 

ये अलेक्सा-दीपक

ये लड्डू-गोपाल-ये तीज-त्योहार 

सब बेमानी लगते हैं 


तू थी

सब था

तेरे बिन सब ख़ाली-खाली लगते हैं 


तुझे साथ ले

मैं आया था

तुझे साथ ले

मैं जाऊँगा 

यह पहली बार होगा जब 

तुझे न कहीं देख पाऊँगा 

मातृ-हीन उस वीरान देश में 

मातृ-हीन उस विशाल देश में 

तुझे बहा मैं आऊँगा 


क्या सैलाना के उस मंदिर में मैं 

एक दिन भी रूक पाऊँगा 

क्या दिल्ली, क्या रतलाम 

जहाँ भी मैं जाऊँगा

क्या तुझे नहीं मैं पाऊँगा 

दुनिया का है वो कौनसा कोना

जहाँ तुझे नहीं मैं पाऊँगा 


राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2021 । सिएटल 


Friday, August 13, 2021

बादल

बादल 

यदि न बरसे

तो निरर्थक है


छाँव अच्छी है

चिलचिलाती धूप से बचाती है


लेकिन बरसें नहीं तो

धान नहीं पकते

जलाशय नहीं भरते

काग़ज़ की कश्ती नहीं चलती

प्यार की पीर नहीं बढ़ती


इधर-उधर डोलती घटा की 

ज़िंदगी तब पूरी होती है 

जब वह बरस जाती है 

मिट जाती है 


राहुल उपाध्याय । 13 अगस्त 2021 । सिएटल 






Monday, August 9, 2021

तुम ख़्वाब में आए हक़ीक़त बनकर

तुम ख़्वाब में आए हक़ीक़त बनकर 

झूठ में सच की एक सूरत बनकर 


वलवले हसीन से हसीन हो गए

एक से एक ख़ूबसूरत बनकर 

(वलवले = उमंगें)


आते-जाते रहें मतभेद हमारे

आफ़त या मुसीबत बनकर 


जो टिका रहा वो मोहब्बत था

साँसों की तरह आदत बनकर 


प्रेम ही देता ईंधन जीवन को

जीव से जीव की लगावत बनकर 


राहुल उपाध्याय । 9 अगस्त 2021 । सिएटल 





Sunday, August 8, 2021

इतवारी पहेली: 2021/08/08

इतवारी पहेली:

अंगूर का दाना ये ## #

मैं क्यूँ कहूँ कि # # #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 15 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 8 अगस्त 2021 । सिएटल















Sunday, August 1, 2021

मेरी कमी को मैंने ताक़त समझा

मेरी कमी को मैंने ताक़त समझा

उसी कमी को उसने आदत समझा


होते रहते सबसे मतभेद मेरे

कभी न किसी को लानत समझा


आते जाते रहते ग़म सुबह-शाम

कभी न किसी को आफ़त समझा


जब भी किसी ने हिदायत दी

हिदायत को बस हिदायत समझा 

(हिदायत = सलाह)


लड़ना-झगड़ना नहीं रग में मेरे

छोड़ दिया तो उसने बग़ावत समझा


राहुल उपाध्याय । 1 अगस्त 2021 । सिएटल 

मीराबाई चानू

मैंने उसके करोड़ को देखा

पथ को लेते मोड़ को देखा


ग़रीब थी धनवान हुई

देश की आज शान हुई


छोटा था, बड़ा पद मिला

यथोचित प्रेम, यश मिला


दिखता उसका संघर्ष नहीं 

परिश्रम से भरे वर्ष नहीं 


रोज़ सुबह जल्दी उठना

पुश-अप करना, पुल-अप करना

घंटो-घंटो रियाज़ करना

इससे भिड़ना उससे लड़ना

छोटे-बड़े अवार्ड जीतना

हार के भी न साहस खोना

आगे-आगे बढ़ते जाना

हर क़दम पे जान लगाना

मन को थामें, बांधे रखना

एक इंच भी न पथ से हटना

जो भी करना ख़ुद को करना

न इससे मिलना, न उससे मिलना

काम से काम, और काम ही करना

घर-परिवार से दूर ही रहना


इतना सब करके भी 

क्या गारंटी है कि 

मिलेगा डेढ़ फुट ऊँची पोडियम पर 

चढ़ के पैर जमाना?

अपने गले में मेडल लटकाना?


एक शाम मैंने उसे सब पाते देखा

नहीं देखा कि लगा उसमें 

जीवन नहीं 

एक ज़माना

ख़ून-पसीना

आँसू-वासू

बस के धक्के 

ट्रेन के डिब्बे 

बरसात की रातें 

गर्मी के दिन

सर्दी की छाँव 

थके से पाँव 


मैंने उसके करोड़ को देखा …


राहुल उपाध्याय । 1 अगस्त 2021 । सिएटल