Saturday, March 5, 2022

तेरी हिम्मत न टूटे कभी

तेरी हिम्मत न टूटे कभी

युद्ध चाहे हो हर दो घड़ी

लम्बी-लम्बी उमरिया को छोड़ो

जो इज़्ज़त से जी वो बड़ी


उन साँसों का चलना भी क्या

जिन साँसों में गर्माई नहीं 

वो कहानी कहानी नहीं 

जिस कहानी में लड़ाई नहीं 

लड़ते रहना ही है ज़िन्दगी 


अपना-अपना है सबका चलन

तेरी सोच भी बुरी तो नहीं 

अच्छा-बुरा है कौन जाने कौन

इसे नापे वो छड़ी तो नहीं 

इसकी-उसकी है किसको पड़ी


जब तलक हैं जहां में सितम

तब तलक न हो लड़ाई खतम 

अब जान जाए तो जाए भला

किसके रोके रूकी ये सनम

सिर झुके ना वही है खुशी


(संतोष आनन्द जी को उनके जन्मदिन पर समर्पित)

राहुल उपाध्याय । 5 मार्च 2022 । सिएटल 



तुम न होते, मैं न होता

तुम न होते, मैं न होता 

प्यार के वादे मैं न बोता 


तेरे सपने साथ न होते 

याद में तेरी मैं न खोता


आते जाते मौसम सारे 

मन मेरा गुलज़ार न होता


फूँक-फूंक कर मैं पाँव रखता 

उड़ने का अरमान न होता 


बहते जाते वक्त के धारे

ख़ुद को ख़ुद का ज्ञान न होता


दिल मेरा बस हॉफ रहता 

गाता जाता पर न रोता


रशिया वाले कुछ भी करते

मुझको न नुक़सान होता 


दब के रहती कुंठा 'राहुल'

ग़ज़लों में मैं पाप न धोता


राहुल उपाध्याय । 5 मार्च 2022 । सिएटल 


Thursday, March 3, 2022

उल्टा सीधा एक समान #26

उल्टा सीधा एक समान #26

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मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


लगा


राहुल उपाध्याय । 4 मार्च 2022 । सिएटल










Re: उल्टा सीधा एक समान #25



शुक्र, 25 फ़र॰ 2022 को पू 1:03 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

उल्टा सीधा एक समान #25

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मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


केले


राहुल उपाध्याय । 25 फ़रवरी 2022 । सिएटल










जोड़ दे सारी ख़ुशियाँ किसी के लिए

जोड़ दे सारी ख़ुशियाँ किसी के लिए

है बड़ा ही सरल आदमी के लिए

प्यार से ही कोई हँस-बोल ले

है बहुत जी भर की ख़ुशी के लिए


दिल से दिल की दूरी तो कुछ भी नहीं 

चाँद-तारों पे जाने से आसान है 

पास आओ किसी के तभी बात हो

ये ज़रूरी नहीं 'गर मन साध ले

आँख मिल जाए किसी से ये सौभाग्य है 

वरना आडियो बहुत है अभी के लिए


जग में आते हैं जाते हैं मौसम बहुत 

हाथ पकड़ के किसीको तो रोका नहीं 

दुख-सुख भी सदा साथ रहते नहीं 

आए-जाए कोई कुछ खोता नहीं 

साथ लाए थे क्या, साथ जाएगा क्या

है सब कुछ यहाँ का यहीं के लिए


राहुल उपाध्याय । 28 फ़रवरी 2022 । सिएटल 

https://youtu.be/m6FA18D6tLI




Tuesday, March 1, 2022

जनता तेरी हिम्मत तक-तक

जनता तेरी हिम्मत तक-तक

छाती फूली जाए 

तुझसे ही है देश की शक्ति

तू ही मान बढ़ाए


दुख हज़ारों सर पे लेकिन

हार न कोई मानी

बादल बरसे,पत्थर फिसले

हार किसी से न मानी

नित-नित करती मेहनत इतनी

कभी न रोती हाए 


जब-जब आया कोई संकट

कमर कसी है तूने

जब-जब कोई नेता बदला

बदल दी सत्ता तूने

कभी किसी को तू न बख्शे

सबको सबक़ सिखाए


बच्चे तेरे बाहर जाए

जाने तू है देती 

वापस 'गर वो लौट भी आए

गले लगा भी लेती 

दिल समंदर से है गहरा

सबको लेत समाए


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2022 । सिएटल 

https://youtu.be/EEUv0xsJd5Y




मैं उसे जानता हूँ

मैं उसे जानता हूँ 

वह भी मुझे जानता है 

मैं कुछ ज़्यादा 

वह कुछ कम


उसने मुझे अपनी किताब में स्थान दिया है 

मेरा नाम नहीं लिया

पर मुझे याद किया है


उसने मेरे बारे में ज़रूर सोचा होगा

लिखते वक्त 

लिखने से पहले

लिखने के बाद

प्रूफ़ रीडिंग के वक्त 

प्रकाशित होने के बाद


आज

उसके दुख की खबर पा कर

मुझे बहुत दुख हुआ 

मुझे अपना लगा

उसका-मेरा क़द बराबर लगा

वह मेरे क़रीब आ गया 


किसी के जाने का

दुख 

एक जैसा ही होता है

कम-ज़्यादा नहीं होता 

आँसू 

एक हो या हज़ार 

आँसू होते ही दुखदायी हैं


वह भी उसकी व्हीलचैयर देख 

वैसे ही रोता होगा 

जैसे मैं अपनी माँ का वॉकर देख रोया था


वह भी उसकी प्लेलिस्ट को देख

वैसे ही रोता होगा

जैसे मैं अपनी माँ के दीपक देख रोया था 


वह भी उसके साये को महसूस करता होगा

उसके कपड़ों में उसकी याद को संजोता होगा

उसकी चीजों को टटोलता होगा


हम दोनों 

सब कुछ होते हुए भी

दुख से दूर नहीं 


सब कुछ होते हुए भी 

एक कमी है 


यही कमी

हमें एक दूसरे से जोड़ती है


आज

उसमें और मुझमें 

कोई फ़र्क़ नहीं 


राहुल उपाध्याय । 1 मार्च 2022 । सिएटल