Wednesday, December 11, 2024

मेरे हाथों से जो खाए

मेरे हाथों से जो खाए

खा के धूम जो मचाए 

उससे कहूँ मुझे पा तो बुलाए


कितना वो क्यूट है वो जाने कहाँ है

दिन भर हँसाए मुझे, मेरा जहां है 

जगता है या फिर सोता है वो

हँसता है या फिर रोता है वो

दौड़े-भागे झूम-झूम

घुटनों-घुटनों रूम-रूम

ऐसा लगे जैसे चाँद पे हैं आएँ


जादू सा जैसे कोई चलने लगा है 

मैं क्या करूँ दिल मचलने लगा है 

उसी से हैं दिन-रात मेरे

उसी से बंधे सब जज़्बात मेरे

झूमूँ-नाचूँ घुम-घुम

उसे लूँ मैं चूम-चूम

पल-पल उसे दूँ मैं लाख दुआएँ 


राहुल उपाध्याय । 11 दिसम्बर 2024 । सिएटल 

Tuesday, December 10, 2024

मुझे कोहरा पसन्द है

मुझे कोहरा पसन्द है

पल भर में शिमला हो आता हूँ 


सब धुंधला ज़रूर दिखता है 

पर यादें सुनहरी हो जाती हैं 


धूप हो

तो दस चिन्ताएँ घेर लेती हैं 

गर्मी हो

तो दिमाग़ गर्म हो जाता है 


मुझे कोहरा पसन्द है

न ज़्यादा आगे का दिखता है 

न पीछे का


राहुल उपाध्याय । 10 दिसम्बर 2024 । सिएटल 


मुझे कोहरा पसन्द है

मुझे कोहरा पसन्द है

पल भर में शिमला हो आता हूँ 


सब धुंधला ज़रूर दिखता है 

पर यादें सुनहरी हो जाती हैं 


धूप हो

तो दस चिन्ताएँ घेर लेती हैं 

गर्मी हो

तो दिमाग़ गर्म हो जाता है 


मुझे कोहरा पसन्द है

न ज़्यादा आगे का दिखता है 

न पीछे का


राहुल उपाध्याय । 10 दिसम्बर 2024 । सिएटल 


Monday, December 9, 2024

हरिनाम न रटो

देखो ओ दीवानों तुम ये ध्यान से सुनो

पढ़ो-लिखो, झूमो-गाओ, हरिनाम न रटो


राम को समझो, कृष्ण को जानो

काम को समझो, रूप को त्यागो 

कर लो ख़ुद पे, खुद पे भरोसा

ख़ुद ही टूटे फिर क्या होगा

जीवन में किसी के तुम ग़ुलाम न बनो


आओ मिलकर हम सब गाएँ 

जो भी समझे, उसे समझाएँ 

जग में आए, कुछ कर के जाए

बैठे-बैठे न हाथ फैलाए

जीवन नाम है काम का, बदनाम न करो


राहुल उपाध्याय । 9 दिसम्बर 2024 । सिएटल 

Sunday, December 8, 2024

Re: इतवारी पहेली: 2024/12/01



On Sun, Dec 1, 2024 at 6:55 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


स्टॉक में आई ये कैसी ####

लग रहा है जैसे कहीं ## ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 8 दिसम्बर 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 1 दिसम्बर 2024 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2024/12/08


इतवारी पहेली:


जब फ़िल्म से ## ## गई 

तब जीत रोल #### गई


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 15 दिसम्बर 2024 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 8 दिसम्बर 2024 । सिएटल 




Friday, December 6, 2024

पुष्पा 2 समीक्षा

सुकुमार द्वारा निर्देशित एवं अल्लू अर्जुन अभिनीत 'पुष्पा 2' में इतना मज़ा नहीं जितना कहानी प्रधान फ़िल्मों से मिलता है। पर एनिमल से कहीं ज़्यादा है। गाने ज़बरदस्ती ठूँसे गए हैं। लेकिन उन गानों का दर्शकों को इंतज़ार रहता है। इसलिए उनका होना आवश्यक हो जाता है। गाने चाहे जैसे हों, हैं बड़े उर्जावान। इतने सारे लोग और इतनी गति कि सर ही घूम जाए। पूरी फिल्म बहुत कसी हुई है। कमाल की एडिटिंग है। ट्रक हो, जीप हो, नाव हो, सब की रफ़्तार देखते ही बनती है। कलात्मकता चरम सीमा पर है। 


कहानी कोई ख़ास नहीं है। फिर भी एकाध प्रसंग को लेकर उत्सुकता बनी रहती है। एक बार तो लगा फिल्म ख़त्म हो गई है। फिर पता चला यह तो इंटरवल है। फिर लगा ख़त्म हो गई। फिर शुरू हो गई। कुछ ज़रूरत से ज़्यादा लम्बी बना दी। 


अल्लू अर्जुन एक बहुत ही अच्छे अभिनेता है। उन्हें पुष्पा से हटकर भी कुछ हिन्दी फ़िल्में करनी चाहिए। 


मसाला फ़िल्म है पर मसाला पूरा नहीं है। एक ही ट्रैक पर चलती रहती है। कॉमेडी बहुत कम है। मधुर संगीत ग़ायब है। ड्रामा कम है। 


शेखावत की भूमिका में फहाद फ़ासिल का अभिनय भी शानदार है। 


अंत में जो क्रेडिट्स रोल होते हैं वे एक मज़ाक़ लगते हैं। कोई नहीं पढ़ पाएगा। क्या मतलब है ऐसे क्रेडिट्स देने का। 


राहुल उपाध्याय । 6 दिसम्बर 2024 । सिएटल