अपना दिल बड़ा करें
दिल है कोई गुफ़ा नहीं
कहने वाले कह रहे
आपसे मैं जुदा नहीं
अजब है हाल आँख का
मिल के भी कुछ हुआ नहीं
जल रहे हैं दीप भी
जलती फ़क़त शमा नहीं
हाथ में जाम है तो क्या
जो करना है वो करता नहीं
राहुल उपाध्याय । 15 जनवरी 2025 । सिएटल
अपना दिल बड़ा करें
दिल है कोई गुफ़ा नहीं
कहने वाले कह रहे
आपसे मैं जुदा नहीं
अजब है हाल आँख का
मिल के भी कुछ हुआ नहीं
जल रहे हैं दीप भी
जलती फ़क़त शमा नहीं
हाथ में जाम है तो क्या
जो करना है वो करता नहीं
राहुल उपाध्याय । 15 जनवरी 2025 । सिएटल
क्या बताए ये क्या ज़माना है
उसने दिल से मुझे निकाला है
मैं क्यूँ ख़ुशगवार हूँ इतना
हँसते-हँसते ये दिन बिताया है
मुझको उससे है प्यार क्यूँ आख़िर
बेवफ़ाई का जो पिटारा है
चलते-चलते ये मोड़ भी आया
आईना ही न मुझको भाया है
किस ज़बां से कहूँ शुक्रिया उसको
टूटकर जिसने मुझको चाहा है
राहुल उपाध्याय । 14 जनवरी 2025 । सिएटल
आज तुम्हारी कॉल बहुत मिस की
एक आदत सी बन गई है
तुम से कुछ कहने की
तुम से कुछ सुनने की
तुम्हारी
चहकती हुई आवाज़
खिलखलाती हँसी में
पुट है
शरतचन्द्र की नायिका का
प्रेमचंद की सादगी का
मीरा की भक्ति का
महादेवी की छाया का
तुम तब क्यों नहीं मिली
जब फ़ाइनल्स के लिए जगना था
और लाख अलार्म्स
और अड़ोस-पड़ोस के कई विद्यार्थी
हार जाते थे
आज
न आँखों में नींद है
न दिल में चैन
और काम इतना पड़ा है
पर मन ही नहीं कर रहा है
कुछ करने का
वक्त थम सा गया है
न सुबह हुई
न शाम हुई
ज़िन्दगी यूँ ही तमाम हुई
राहुल उपाध्याय । 6 जनवरी 2025 । सिएटल
ग़म भी तेरा मिले तो प्यारा है
चाँद-सितारों पे घर हमारा है
सारी दुनिया की तोहमतें सह कर
हमने अपना ये घर सँवारा है
तू ख़ुश-ख़ुश है आजकल जितनी
उतना ही ख़ुश ये जहान सारा है
हमको तुमसे है कब-कहाँ शिकवा
तू नहीं तो ये दिल बिचारा है
तेरे मिलने से है आज बेफ़िक्री
मैंने सब-कुछ जो तुझपे वारा है
राहुल उपाध्याय । 6 जनवरी 2025 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:46 AM
आपका क्या कहना है??
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इतवारी पहेली:
हमने दर्ज़ी से कहा रेशम का एक ## ###
और उसने शुरू कर दी रेशमा की ### ##
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 जनवरी 2025 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 5 जनवरी 2024 । सिएटल
इतवारी पहेली:
नौकरी में नहीं पैसे, इसी में # ###
जिसे कहते हैं कम्प्यूटर वाले ## ##
(दूसरी पंक्ति का पहला शब्द अंग्रेज़ी का है जिसका अर्थ जुगाड़ भी समझा जा सकता है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जनवरी 2024 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 29 दिसम्बर 2024 । सिएटल
दिल का रिश्ता बड़ा ही प्यारा है
क्या हुआ जो ये दिल हारा है
आईना झूठ तो नहीं कहता
हमने ही रंग ये उतारा है
मिल गया कोई हमदम हमको
क्या कहें गुलसितां वो सारा है
हद से बढ़ कर कहाँ कोई चाहे
हम ही हैं जिनको इश्क़ ने मारा है
आदमी आज भी है आदम वो ही
वस्ल की चाह ने कब सुधारा है
राहुल उपाध्याय । 4 जनवरी 2025 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:09 PM
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