Tuesday, February 15, 2022

कोरोना जा रहा है

अब कोरोना जा रहा है 

मन घबरा रहा है 


रोज़ एक ही बुरी ख़बर सुनने की

आदत सी हो गई थी

अब न जाने क्या-क्या सुनना पड़ेगा 


लोग मिलने-जुलने लगेंगे 

झूठे गले मिलने लगेंगे 

नये-नये बहाने बनाने लगेंगे


जहाँ न जाना चाहता हूँ 

वहाँ भी जाना पड़ेगा 

जहाँ जाना चाहता हूँ 

वहाँ से न जाने क्या-क्या सुनना पड़ेगा 


कोरोना 

जैसा भी था 

साथ तो था

वरना

आजकल 

दो बरस 

कौन रूकता है किसके पास?


कोरोना जा रहा है 

मन घबरा रहा है …


राहुल उपाध्याय । 15 फ़रवरी 2022 । सिएटल 





Sunday, February 13, 2022

ये हक़ीक़त तो व्हाट्सएप पे बयां होती है

कौन कहता है कि हिन्दुस्तान में दहशत की हवा फैली है 

ये हक़ीक़त तो व्हाट्सएप पे बयां होती है 


होता कुछ और है 

और बयां कुछ और किया जाता है 


बात हिजाब की होती है 

और हवाला अफ़ग़ानिस्तान का दिया जाता है 


बात होती है प्रवासी मज़दूरों के दुख-दर्द की

और ठीकरा केजरीवाल के सर फोड़ा जाता है 


बात होती है बेरोज़गारी की

और काशी विश्वनाथ के जीर्णोद्धार का हवाला दिया जाता है 


बात होती है साफ़ पानी की 

और अस्मिता को बचाने का पर्चा बाँट दिया जाता है 


बात होती है शिक्षा में सुधार की 

और लाखों नौकरियों का जुमला छोड़ दिया जाता है 


बात होती है स्वास्थ्य उद्योग में भ्रष्टाचार की

और डी-आर-डी-ओ की जादुई गोली का नाटक किया जाता है 


कौन कहता है कि हिन्दुस्तान में दहशत की हवा फैली है 

ये हक़ीक़त तो व्हाट्सएप पे बयां होती है 


राहुल उपाध्याय । 13 फ़रवरी 2022 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2022/02/13


इतवारी पहेली:


सबको असीम प्रेम है लता # #

बड़े कहते थे प्यार से लता ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 20 फ़रवरी को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 13 फ़रवरी 2022 । सिएटल 
















Re: इतवारी पहेली: 2022/02/06



रवि, 6 फ़र॰ 2022 को पू 12:38 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


कैसा अजीब-ओ-गरीब शब्द है #### 

जैसे बातें करती हो सिर्फ़ ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 फ़रवरी को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 6 फ़रवरी 2022 । सिएटल 
















Saturday, February 12, 2022

हर तरफ़ अब यही अफ़साने हैं

https://youtu.be/e-HeHv7BJeo


हर तरफ़ अब यही अफ़साने हैं

हमें तुम्हें कपड़े पहनाने हैं


कितनी सच्चाई है इन बातों में

छोटे बच्चे भी देख न पाए

वो कभी जीन्स तो कभी कुछ ले कर

बखेड़े छोटे-बड़े कर जाए

वोट पड़ जाए न फिर आने हैं


एक हल्का सा बखेड़ा इनका

कभी इसको तो कभी उसको लूटेगा 

किस तरह प्यास बुझेगी इनकी

किस तरह इनका नशा टूटेगा

जिनके हाथों में मज़हबी दस्ताने हैं


उनका जिव्हा पे नहीं है क़ाबू 

कर रहें वादे घूम गली-गली

कभी इतने की, कभी उतने की 

लगा देंगे ये नौकरी 

रास्ते वोट के पुराने हैं


राहुल उपाध्याय । 12 फ़रवरी 2022 । सिएटल 




Friday, February 11, 2022

मैं जो चाहूँ वो मैं पहनूँ

https://youtu.be/znvCdAvzeGU


मैं जो चाहूँ वो मैं पहनूँ 

तुझे उठी क्यूँ तान है

जितना तेरा, उतना मेरा

सबका हिन्दुस्तान है


मज़हब का तू चश्मा पहने

रहता क्यूँ अनजान है

तेरे घर भी, मेरे घर भी

रहते सब इंसान हैं


नाहक बक-बक क्यूँ है करता

कहता ऊटपटाँग है

आज ये पहनूँ, कल वो पहनूँ

इससे क्यूँ परेशान है


जब जो चाहूँ वो मैं पहनूँ 

ये मेरा अधिकार है

साड़ी, स्कर्ट, टॉप, सूट

हिजाब सब परिधान हैं


लड़ाई-झगड़े हैं हथकण्डे 

ध्यान बँटाते यार हैं

काम निपटते ही ये सारे

होते अंतरध्यान हैं


आते-जाते नेता सारे

रंग बदलते घाघ हैं

आज किसी की रक्षा कर के

करते कल को ख़ाक हैं


रोज़ी-रोटी की ये सोचें

इनकी न औक़ात है 

छुटपुट-छुटपुट मसलों से ही

होते मालामाल हैं


जब भी नेता मिलने आए

करते वादे लाख हैं

पाँच साल फिर खा-पी कर के

करते वो आराम हैं 


राहुल उपाध्याय । 11 फ़रवरी 2022 । सिएटल 



लता

अभी लता को गए

एक हफ़्ता भी नहीं हुआ है 

और लोग बोर होने लगे हैं 

उनके गीतों की पोस्ट्स से

उनसे सम्बंधित किसी बात से 


जिस दिन गुज़री थी

लगा था 

जैसे कोई पहाड़ टूट पड़ा है 

कोई अपना चला गया है 

न हँसने का मन था

न गाने का

बस उन्हीं की यादों में 

खो जाने को दिल करता था


अच्छा लगा

देखकर भीड़ 

जो उनके साथ 

चिताग्नि तक गई


अच्छा लगा

राजकीय शोक 

जो दो दिन तक रहा

झण्डे झुके रहें

आकाशवाणी से शोक धुन

बहती रही


लेकिन अब?

कब तक रोओगे?

आगे बढ़ो 

जो होना था हो गया

देखो

यह वेलेण्टाइन डे आ गया

और यह न पसन्द हो तो

पुलवामा को ही याद कर लो


कुछ भी करो

चुनाव पकड़ो

हिजाब पर लड़ो

बस लता को छोड़ो


मैं क्या करूँ?

मेरे पास तो एक लम्बी फ़ेहरिस्त है 

उनके गानों की


मैं और मेरी तन्हाई 

अक्सर बातें करते हैं 

उनके गानों की


राहुल उपाध्याय । 11 फ़रवरी 2022 । सिएटल