Sunday, November 13, 2022

इतवारी पहेली: 2022/11/13


इतवारी पहेली:


ध्यान से देखा तो ठंड में # ## #

और ख और ग के ऊपर ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 20 नवम्बर 2022 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 13 नवम्बर 2022 । सिएटल 















Thursday, November 10, 2022

तो कहना

मेरी कविता 

तुम्हें छू जाए

तो कहना


एक अरसा हुआ

कोरोना गए

अब छू जाए, तो कहना


मैं कहाँ कुमार

मैं कहाँ विश्वास 

मेरी बात तुम तक 

पहुँच जाए

तो कहना


राहुल उपाध्याय । 8 नवम्बर 2022 । सिएटल 

https://youtube.com/shorts/JYuSEnWsIJA?feature=share





कहता नहीं था

कहता नहीं था 

कहने लगा हूँ 

तुमसे जुदा 

जीने लगा हूँ 


समन्दर में पानी

बहुत था मगर

मीठा पानी

पीने लगा हूँ 


आग़ोश क्या है 

मुझे क्या पता था 

अब जाके किसी के 

सीने लगा हूँ 


राहुल उपाध्याय । 9 नवम्बर 2022 । सिएटल 

https://youtube.com/shorts/oUa2f5nK3ck?feature=share


Monday, November 7, 2022

मज़ा आ गया

चाँदनी रात में

चाँद के सामने

सर झुकाना पड़ा 

तो मज़ा आ गया 


चलते-चलते मेरे

पाँव थकने लगे

यार मिल जो गया

तो मज़ा आ गया 


जोश ही जोश में 

इश्क़ की मौज में

वो जो दरिया हुआ 

तो मज़ा आ गया 


आप ही आप में

खोए रहते थे हम

मिल गया दूसरा

तो मज़ा आ गया 


आग में आग दे

मिटी सारी अगन

इश्क़ बरपा हुआ

तो मज़ा आ गया 


राहुल उपाध्याय । 7 नवम्बर 2022 । सिएटल 







वे साईकल से कार तक आ गए

वे साईकल से कार तक आ गए 

हम कार से कार तक ही रह गए


वे कच्चे घर से पक्के घर आ गए

हम पक्के से पक्के तक ही रह गए 


वे चूल्हे से गैस पर आ गए 

हम गैस के गैस पर ही रह गए 


हम सुखी हैं

वे ज़्यादा सुखी हैं 


राहुल उपाध्याय । 7 नवम्बर 2022 । सिएटल 



Saturday, November 5, 2022

तुम अच्छी हो

तुम अच्छी हो

यह देखकर अच्छा लगा 

तुम अच्छी लग भी रही थी

लेकिन थाउज़ेण्ड वॉट वाले 

बल्ब सी नहीं, कुछ बुझ सी गई हो


तुम्हारे कपड़े हमेशा 

सजीले, रंगीले, लुभावने रहे है

कल भी थे, लेकिन उनमें वो ललक, 

वो लहर, वो लचक नहीं थी 


तुम्हारी हँसी हमेशा हसीं रही है 

दांत भी मोती से चमक रहे थे

लेकिन हँसी अब हसीं नहीं 


लगता है 

जो कुछ भी मैंने दिया

वह सब तुम खो चुकी हो

या कहीं रख कर भूल गई हो

या सम्हाल के रखा है ताकि एक दिन

जब हम एक हों काम आ सके


तुम मिली

अच्छा लगा

मिलती रहना

सम्भावनाएँ बनी रहती हैं 


तुम बैंगन भी लाई

जो मुझे बेहद पसंद हैं

तुमने मुझे अपनी प्लेट से 

एक चम्मच गाजर का हलवा

खाने भी दिया, 'ताल' याद आ गई 


'परदेस' भी


किसी रोज़ तुम से मुलाकात होगी

मेरी जान उस दिन मेरे साथ होगी

मगर कब ना जाने ये बरसात होगी

मेरा दिल है प्यासा मेरा दिल अकेला


राहुल उपाध्याय । 5 नवम्बर 2022 । सिएटल 





Friday, November 4, 2022

आज मेरा जन्मदिन है

आज मेरा जन्मदिन है 

और इतने तोहफ़े मिले कि

मन ख़ुशी से सराबोर है


इसने भी फ़ोन किया

उसने भी फ़ोन किया

एक का तो फ़ोन मैं ले भी नहीं पाया

और उसका तो टेक्सट भी आ गया 

जिससे मेरा दूर-दूर का वास्ता नहीं


टेक्सट आ गया है 

नूर आ गया है 

नहीं तो

चराग़ों से लौ जा रही थी


ये फ़ोन 

ये टेक्स्ट

जन्मदिन के नहीं थे

उन्हें तो पता भी नहीं 

कि कब है 


बस यूँही 

फ़ोन आते रहे

दिल लुभाते रहे

हम बतियाते रहे


इनसे बड़ा उपहार 

और क्या हो सकता है 

कि किसी का मन 

बिना बात के

बात करने को चाहे


राहुल उपाध्याय । देवोत्थानी एकादशी, सम्वत् 2079 । सिएटल