Tuesday, February 12, 2008

पहेली 15


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

एवरेस्ट पर ये आज तक चढ़ी नहीं हैं
युद्ध में भी ये आज तक लड़ी नहीं हैं
पहनती भी ये साड़ी-चूड़ी नहीं हैं
दिखने में भी लगती बूढ़ी नहीं हैं

जिस बात से अच्छी खासी शादी टूट जाती है
जिस बात से बसी बसाई गृहस्थी लूट जाती है
उसी बात को इन्होने किया था नज़र-अंदाज़
आखिर क्यूं और क्या था इसका राज़?
क्यूंकि दूर-दृष्टी से इन्होने लिया था काम
इनको तो हर कीमत पर हासिल करना था राज

छीन लेती अगर पति से समर्थन ये अपना
पार्टी का समर्थन बस रह जाता एक सपना

जल्दी दे दे उत्तर जो सही सही है
ये आज यहां तो कल और कहीं हैं
एक जगह कहीं भी ये रुकती नहीं हैं
इन दिनों जब भी नज़र आती हैं तो छवि सब जगह बस यहीं है
मुस्काराती जाए और हाथ हिले, रीत भी तो वैसे बिलकुल यहीं है
[इस पहेली का हल अंतिम पंक्ति में छुपा हुआ है। ध्यान से देखे तो साफ़ नज़र आ जाएगा। उदाहरण के तौर पर देखे 'पहेली 1'. आप चाहे तो इसका हल comments द्वारा यहां लिख दे। या फिर मुझे email कर दे इस पते पर - upadhyaya@yahoo.com ]

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4 comments:

Anonymous said...

विशाल:
थोडा मुशकिल था, पर मुझे लगता है ..

हिलेरी

रिपुदमन पचौरी said...

हाँ...

हिलेरी

Anonymous said...

Saari riddles bahut achhi lagin, Rahul. Ek taraf har riddle mein sundar poetry hai aur doosri taraf ek sawaal aur jawaab. Ek dum unique combination...

सन्जय शर्मा said...

ओ बामांग आने के बजाइ उसी से लड़ी है