Wednesday, June 3, 2026

दो दिन का ये वादा नहीं

दो दिन का ये वादा नहीं

चाहा तुम्हें, है मांगा नहीं


चमन में खिला इक फूल हो

बटन पे कभी लगाया नहीं


लगते तो हो हूर-नूर से

छू के कभी देखा नहीं


बरसों से हम हैं साथ में

फिर भी तुम्हें पाया नहीं


मेरी ज़िंदगी का ये सार है

जो पाया नहीं, खोया नहीं


राहुल उपाध्याय । 3 जून 2026 । सिएटल 








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