Friday, March 23, 2018

If promises are kept

If promises are kept
Can a heart be broken?

Yes, it can. 

There's 
No correlation 
Between what happens 
And what is felt

Life is too random 
To play into the 
Hands of a script

Then
Should one ever
Do anything right?

Yes. 
You write
Your own script 
She writes
Her own script
He writes
His own script 
We all write 
Our own scripts

And then
Life happens 

March 16, 2018
Ratlam 

Thursday, March 22, 2018

दोस्तों से दुश्मनी

दोस्तों से दुश्मनी 
दुश्मनों से यारी
गणित 'गर समझो
है सब से यारी

जितने भी मुख हैं
उतनी हैं बातें
तभी तो है दुनिया
ये इतनी न्यारी

मुसलसल चलें हम
चलें ध्येय चुन के
मिले न मिले, मिटे
लगन न हमारी

कहीं कोई होगा
कभी जो कहेगा
याद आई हमको
बहुत ही तुम्हारी

कई गाँव छीने
लड़कपन ने हमसे
तब तो लगा कि
की होशियारी

10 मार्च 2018
सिएटल | 425-445-0827

Wednesday, March 21, 2018

तुम हो भी और नहीं भी

तेरी ख़ुशबू में बसे ख़त 
तो मैं कब के बहा चुका हूँ
आग बहते पानी में लगा चुका हूँ

तुम जब तक मिली
तब तक कैमरे बंद हो चुके थे
इसलिए
एक भी फ़ोटो नहीं 
जिसे फाड़ सकूँ
एक भी नेगेटिव नहीं 
जिसे जला सकूँ

हाँ
सारे फ़ोटो 
डिलिट कर चुका हूँ
हर फोन से
हर यू-एस-बी ड्राईव से
हर फ़ोल्डर से
यहाँ तक कि
ट्रैश और डिलिटेड आईटम्स
वाले फ़ोल्डर से भी
हमेशा-हमेशा के लिए
डिलिट कर चुका हूँ

लेकिन 
सुना है कि
क्लाउड में फ़ोटो 
डिलिट होकर भी डिलिट नहीं होते

जब कभी
बरसात होती है
सराबोर हो जाता हूँ
तुम्हारे 
पिक्सेल्स में 

कितना भी नहाऊँ 
कितना भी पोछूँ 
तुम कहीं न कहीं छूट ही जाती हो
कार के वाईपर्स में 
साईड मिरर्स पर
बालकनी के कोने में 

जब कभी इन्द्रधनुष देखता हूँ
तो सोचता हूँ
तुम यह भी हो और वह भी
तुम हो भी और नहीं भी

राहुल उपाध्याय | 22 मार्च 2018 | सैलाना

Tuesday, March 20, 2018

तुम थे तो

तुम थे तो
ज़माना रोशन था
तुम्हारे गीतों का
रिमझिम सावन था

तुम्हारे कवित्त के
गुणों से हम अवगत थे
तुम्हारे गुण गाते 
हम नहीं थकते थे

लेकिन
ऐसा न था

लेकिन ऐसा न था
फ़क़त हम आज
यह सब कहते हैं
जब तुम सदा के लिए
कूच कर चुके हो
और
फिर आज के बाद कुछ
कहेंगे भी नहीं

क्या कभी हम कोई
कविता दोहराएँगे 
जिसका रचनाकार
साल दो साल नहीं 
दस साल जीएगा?
या हम फिर खेमों में बँट जाएँगे?
इधर-उधर की गप्पें लगाएँगे?
और साल में तीन-चार बार
कभी निराला
कभी दिनकर 
कभी महादेवी
तो कभी जावेद-गुलज़ार को ही उद्धृत कर पाएँगे?
क्या कभी हम इनसे भी आगे बढ़ पाएँगे?
इनसे उबर पाएँगे?

तुम थे तो ...

(हर किसी बड़े कवि के गुज़रने पर)
————————
उद्धृत = quote 

Sunday, March 18, 2018

तेरा होना

तेरा होना
जैसे
सूरज का निकलना
चाँद का ढलना
व्हाट्सैप पे गुड मॉर्निंग का आना

कभी नाउम्मीद नहीं करता
शाश्वत सत्य है 
***
तूझे समझना
जैसे
तितली पकड़ना

हाथ आ भी जाए
तो ग़लत समझना
***
तूझे पाना
जैसे
ख़ुद को पकड़ना

17 मार्च 2018
शिवगढ़

Saturday, March 17, 2018

जो होते हैं पास उन्हें दूर कर देता है

जो होते हैं पास
उन्हें दूर कर देता है
आदमी आदमी को 
कितना मजबूर कर देता है

वो हाड़-माँस का पुतला
लगता ही नहीं 
आदमी आदमी को
कितना मशहूर कर देता है

कल सुबह होगी
और हम फिर मिलेंगे
आदमी आदमी को
कितना मगरूर कर देता है

मिले तो ऐसे
जैसे सदियों के बिछड़े हो
आदमी आदमी को
कितना पुरनूर कर देता है

काले समुद्र के उपर, 39,000 फ़ीट की ऊँचाई पर
14 मार्च 2018
(स्टीवन हॉकिंग के निधन पर)