Tuesday, February 12, 2019
कितनी नींवें रखी गईं हैं
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:03 PM
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Labels: world of poetry
Monday, February 4, 2019
दो साल में चार दिन ही बचे थे
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:56 PM
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Labels: misc
Wednesday, January 23, 2019
किताबें
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:01 PM
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Labels: digital age
Saturday, January 12, 2019
बचपन के साथी हैं पचपन के पार
बचपन के साथी हैं पचपन के पार
मोटी है तोंद और ग़ायब हैं बाल
फिर भी न थमी, और हुई तेज़ रफ़्तार
जीते हैं सब, किसी ने मानी न हार
अपनों को खोया, तो पाया ग़ैरों का प्यार
बंगलो के स्वामी, और दो-तीन हैं कार
पासपोर्ट है सबका, भरी सबने उड़ान
मिलते हैं तो लगता है जैसे मिले कल ही थे यार
बिछड़े तो लगता है जाने अब कब होगी मुलाक़ात
बचपन के साथी है पचपन के पार
12 जनवरी 2019
सिएटल
Thursday, January 3, 2019
इसमें इतना भी क्या सोचना?
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:11 AM
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Labels: greetings
