Wednesday, May 6, 2020
बेरूखी घर कर जाएगी
अब जो कोई खेल खेलोगे
कोई राहगीर
गेंद उठाकर न देगा
अब जो कहीं घूमने जाओगे
कोई दूसरा
तुम्हारे कैमरे से
तुम्हारी फ़ोटो नहीं लेगा
अब जो घर से निकलोगे
तो बहुत ज़रूरी काम से ही निकलोगे
अब जो किसी से मिलोगे
तो किसी अनजान से ही मिलोगे
अब जो किसी का चेहरा देख लोगे
तो मुँह फेरने को जी करेगा
महामारी तो मर जाएगी
बेरूखी घर कर जाएगी
राहुल उपाध्याय । 6 मई 2020 । सिएटल
Thursday, April 30, 2020
चल मेरे भाई
ब्रेकिंग न्यूज़ ब्रेक भी कर सकती है
यह आज समझ आया
वैसे ही इरफ़ान के चक्कर में
रात को ठीक से सोया नहीं
फिर भतीजे को पुत्ररत्न की प्राप्ति हो गई
बेटे का चौबीसवाँ जन्मदिन भी था
और एक सहपाठी का भी
सो सब गड्डमड्ड हो गया
कब रात ख़त्म हुई
कब दिन शुरू
और फिर शाम
लगा जैसे किसी लम्बी फिल्म का
हिस्सा बन गया हूँ
जो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही
और यह ख़बर आ गई
सुना था बड़ी मौतें तीन के झुंड में आती है
लेकिन क्या सारी सुनी बातें सच होती हैं?
कहते हैं फ़िल्मों में
भाई-भतीजावाद बहुत है
पिता भी कलाकार
बेटा भी
दादा भी
भाई भी
चाचा भी
लेकिन प्रशंसक भाई भतीजा नहीं देखते हैं
जो पसंद आता है वही देखते हैं
बॉबी से लेकर क़र्ज़ तक
कभी-कभी से लेकर लैला-मजनू तक
तुम्हें हाथों-हाथ लिया
चल मेरे भाई
तेरे हाथ जोड़ता हूँ ...
राहुल उपाध्याय । 30 अप्रैल 2020 । सिएटल
Wednesday, April 29, 2020
ऐसा भी कहीं होता है क्या?
मैं सोने जा रहा था
और तुम सो गए चिरनिद्रा में
मेरी नींद उड़ा कर
ऐसा भी कहीं होता है क्या?
अभी दो-चार दिन पहले
तुम्हारी माँ गुज़री
तुम्हारा कोई अता-पता न था
मेरा माथा ठनका था तभी
ऐसा भी कहीं होता है क्या?
और तुम्हारी फिल्म भी तो अभी आई थी
तुम भी हाल ही में ठीक होकर आए थे
कोविड के होते हुए
कोविड ने तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा
फिर भी तुम चल दिए
ऐसा भी कहीं होता है क्या?
राहुल उपाध्याय । 29 अप्रैल 2020 । सिएटल
Wednesday, April 22, 2020
तेल का दाम शून्य से कम
तेल का दाम
शून्य से कम?
कई लोग
इसे समझने में
असमर्थ हैं
लेकिन हिन्दी का कवि
इस अर्थव्यवस्था से
भलीभाँति परिचित है
अपने ही पैसों से किताब छपवाना
अपने ही ख़र्चे पर लोकार्पण
एक नहीं
कई बार करवाना
चाय पिलाना
समोसा खिलाना
फिर भेंट में हस्ताक्षरित प्रति देना
जो कि पढ़ी तो कभी जाती नहीं है
लेकिन नज़र भी कभी नहीं आती है
यह सब करना
उसे अत्यंत सुख देता है
मानो कविता छपी नहीं
तो वह सड़ जाएगी
तेल वालों की भी वही दुविधा है
तेल निकलता न रहा
तो मशीन में जंग लग जाएगी
पूरा धंधा चौपट हो जाएगा
सामने वाले के काम न आए
तो वह क्यूँ ले?
बस ऐसे ही
लेने के देने पड़ जाते हैं
कविता लिख दी
और भेजे जा रहे हैं
एक ढीठ की तरह
चाहे सामने वाला
कितना ही मना क्यों न करे
राहुल उपाध्याय । 22 अप्रैल 2020 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:06 PM
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Labels: news, world of poetry
Tuesday, April 21, 2020
जो उसने कहा नहीं
वह एक के बाद एक
प्रेम गीत गाए जा रही थी
मैं समझा वो इश्क़ का इज़हार कर रही है
मुझसे प्रेम का इकरार कर रही है
मुझे क्या पता कि
वह तो अंताक्षरी खेल रही थी
किसी ने कहा उसने आठ दिन से
अन्न छोड़ रखा है
मैंने सोचा वाह यह तो विरह की वेदना की
पराकाष्ठा है
मुझे क्या पता कि
वह यह सब स्वस्थ रहने के लिए कर रही है
उसने दस दिन से
अपना डी-पी नहीं बदला
मैंने सोचा ब्रेकअप के बाद
अब वह उदास है
दुनिया से जी उचट गया है
मुझे क्या पता कि
उसका नेट नहीं चल रहा है
यही दिक्कत है
आशिक़ के साथ
जो उसने कहा नहीं
वह वही सुन लेता है
राहुल उपाध्याय । 21 अप्रैल 2020 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:34 PM
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Labels: relationship
Monday, April 20, 2020
इस उम्र में और ब्रेकअप??
इस उम्र में और ब्रेकअप??
यार तुम बहुत ख़ुशक़िस्मत हो
अब कौन इन्हें समझाए कि
उम्र के साथ दिल कमजोर हो जाता है
और ब्रेकअप से पैकअप होते देर नहीं लगती
ब्लड प्रेशर के घटने-बढ़ने का डर लगा रहता है
साँस फूल जाती है
हवा खिसक जाती है
पसीने छूट जाते हैं
होंठ सूखने लगते हैं
माना कि
कोविड जानलेवा बीमारी है
और ऐसिम्प्टोमेटिक है
लेकिन ब्रेकअप तो और भी भयंकर है
इसका तो
कोई टेस्ट भी नहीं है
अच्छे-भले बात कर रहे थे
और न जाने किस बात पर
पासा पलट गया
कल ही जनम जनम की
योजनाएँ बना रहे थे
यहाँ जाएँगे
वहाँ जाएँगे
ये देखेंगे
वो देखेंगे
इससे मिलेंगे
उससे मिलेंगे
सब का सब धरा रह गया
और इसमें उलझ गए कि
तुम ऐसी हो
तुम ऐसे हो
तुम नहीं समझोगे
तुम्हें कभी समझ नहीं आएगी
जो परी थी
परी नहीं लगती
जो नूर था
वो क्रूर हो गया
दधकता अंगार हो गया
बाय कहने तक की नौबत नहीं आई
और जुदा हो गए
अब इस उम्र में कोई कितने
ट्रान्स्पलांट करवाए
कितने रिप्लेसमेन्ट करवाए
एक अंतराल के बाद
शायद फिर एक हो जाए
कभी किसी
आईस क्रीम पर
या कॉफ़ी पर
फिर से परी और नूर मिल जाए
राहुल उपाध्याय । 20 अप्रैल 2020 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:14 PM
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Labels: relationship
Sunday, April 19, 2020
मेरी चौथी कक्षा तक पढ़ीं माँ
मेरी चौथी कक्षा तक पढ़ीं माँ
आज अमेरिका की ग्रीनकार्ड धारक हैं
यह सब संतोषी माता के व्रत का प्रताप है
आज मेरा गर्लफ़्रेंड से ब्रेकअप हो गया
कल शनिवार को गाड़ी में तेल डलवाया था
यह उसका परिणाम है
यानि सुखी जीवन के लिए
शुक्रवार को खटाई खाना बन्द करो
शनि को पेट्रोल की दुकान
गुरू को नाई की
जो इन नियमों का उल्लंघन करेंगे
वे भुगतेंगे
कोरोना उन्हें ढूँढ निकालेगा
वे बचकर नहीं जा सकते
वह अदृश्य है
सब को परख रहा है
कर्मों के पलड़े में तौल रहा है
और तुम मूर्खों की तरह टेस्ट पर टेस्ट
किए जा रहे हो
वे
जिन्होंने गाय पाली हैं
जिन्होंने देसी घी खाया है
ज्योतिर्लिंग के सामने शीश नवाया है
वे सुरक्षित हैं
हम ज्ञान-विज्ञान-अज्ञान के उस छोर पर हैं
जहाँ हर बात ग़ौर करने लायक़ है
न कोई ग़लत है
न कोई सही है
सब का सब गड्डमड्ड है
अभी भी नासे रोग हरे सब पीरा के नारे लगते हैं
अभी भी निरर्थक दीप जलते हैं
अभी भी वही सब होता है
जो हज़ारों साल पहले होता था
कहते हैं
हवा साफ़ है
मृत्यु दर गिर गई है
परिवार ख़ुश है
लोग दान पुण्य कर रहे हैं
सतयुग आ गया है
यह कैसा सतयुग?
जहाँ ग़रीब दान पर आश्रित है?
जहाँ महामारी का आतंक है?
जहाँ हर घर एक जैल है?
क्यों नहीं खोल देते
मन्दिर-मस्जिद-गिरजे
क्या पता
दवा नहीं तो दुआ ही काम आ जाए
क्या सारी दुनिया
नास्तिक हो गई?
क्या किसी ने भी
एक भी नेता ऐसा नहीं चुना
जिसे धर्म संस्थानों पर विश्वास हो?
राहुल उपाध्याय । 19 अप्रैल 2020 । सिएटल
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