Thursday, September 3, 2020

जब तक न हो सूरज का साथ

जब तक न हो सूरज का साथ

क्या तब तक न कहूँ मैं अपनी बात?


अंधों के बीच काणा हूँ मैं 

आता हूँ काम, हो दिन या रात 


कुछ समझ रहे, कुछ बिगड़ रहे

मेरे विकास में है सबका साथ 


अकेला चना ना भाड़ फोड़े सही

वट वृक्ष को देता बीज लाखों पात 


इस उम्र में क्या होऊँ हताश 

है हर दिन नेमत, हर दिन सौग़ात 


राहुल उपाध्याय । 3 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Wednesday, September 2, 2020

सीमित न करो विस्तार

दो अक्षर के राम हैं

दो अक्षर के जाम

दो अक्षर का नशा है 

दो अक्षर का है काम


दो अक्षर का जीव है 

दो अक्षर की मौत

दो अक्षर की हार है

दो अक्षर की जीत


दो अक्षर का सुख है

दो अक्षर का दुख

दो अक्षर का है रवि

दो अक्षर का शशि


दो अक्षर की हीर है

दो अक्षर की पीर

दो अक्षर की आग है

दो अक्षर का नीर


अक्षर क्षर होते नहीं 

इनसे निर्मित ब्रह्माण्ड 

कहीं दो, कहीं तीन हैं

कहीं चार और पाँच 


अक्षर एक ईकाई है

रचो जो चाहे संसार

ढाई आखर के फेर में 

सीमित न करो विस्तार


राहुल उपाध्याय । 2 सितम्बर 2020 । सिएटल


Tuesday, September 1, 2020

राम रचि राखा

यह सब क्या हो रहा है?


एक राष्ट्रपति

इलाज के लिए

अस्पताल जाता है

और संक्रमित हो जाता है


कैसे?

क्या योद्धाओं से

कोई भूल हुई?


गृहमंत्री

मुख्यमंत्री

महानायक 

सब के सब

संक्रमित


कैसे?

क्या सारी हिदायतें 

कोरी लफ़्फ़ाज़ी हैं?


होइहि सोइ जो राम रचि राखा ...


राहुल उपाध्याय । 1 सितम्बर 2020 । सिएटल


हैं कमल हरे-भरे

हैं कमल हरे-भरे

हैं क़लाम डरे-डरे

ज़रा देखो तो

किस को किस की ख़बर 

इक रात होके निडर

ज़रा सोचो तो


बात कही

गुपचुप ही कही

जब भी कही

कही दबकर 

और इससे बड़ा नहीं 

कोई अपराध 

तू जाने ना


विरोध में है 

जीवन की खुशी

देती है खुशी 

कई ग़म भी

तू मान भी लें 

कभी हार

मैं मानूँ ना


(कैफ़ी आज़मी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2020 । सिएटल

https://www.youtube.com/watch?v=fWt9Dzv2Qo0 


Monday, August 31, 2020

तुम कितने अच्छे हो

तुम कितने अच्छे हो

सच्चे हो

बिलकुल भोले बच्चे हो


कुछ डेट्स के बाद


तुम्हें अपनी ज़िम्मेदारी का 

अहसास ही नहीं है 

कब तक बच्चे बने रहोगे?


ब्रेकअप के बाद


बाप रे बाप!

क्या आदमी था

जितना कहो

बस उतना ही

समझता था


राहुल उपाध्याय । 31 अगस्त 2020 । सिएटल 


Sunday, August 30, 2020

मैं गया नहीं गया हूँ

मैं गया नहीं गया हूँ

और लॉकडाऊन में जा भी नहीं सकता

और न ही जाने का कोई विचार है

विशेष तौर पर पितरों के तर्पण के लिए


मुझे कोई भी ऐसी प्रक्रिया 

पसन्द नहीं 

जिससे एक वर्ग विशेष ही

लाभान्वित हो


राहुल उपाध्याय । 30 अगस्त 2020 । सिएटल 


तुझे मालूम है, तूझे मालूम है

तुझे मालूम है, तूझे मालूम है 

पग-पग की ख़बरें तूझे मालूम है


कौन आएगा, कौन जाएगा 

तुझे मालूम है, तूझे मालूम है

तूझे पग-पग की ख़बरें मालूम है 


तू क्यूँ बदलेगा अपनी चाल पुरानी 

तू क्यूँ बदलेगा अपनी राह सुहानी

तू क्यूँ बदलेगा अपनी चाल सुहानी 

तू क्यूँ बदलेगा अपनी राह पुरानी 

तू अनजान नहीं, तू तो मासूम है

तूझे मालूम है, तूझे मालूम है 

पग-पग की ख़बरें तूझे मालूम है


कोरोना आएगा, कोरोना जाएगा 

तू क्यूँ बदलेगा अपनी चाल पुरानी 

तू क्यूँ बदलेगा अपनी राह सुहानी

तू क्यूँ बदलेगा अपनी चाल सुहानी 

तू क्यूँ बदलेगा अपनी राह पुरानी 

तू अनजान नहीं, तू तो मासूम है

तू अनजान नहीं, तू तो मौसम है

तूझे मालूम है, तूझे मालूम है 

पग-पग की ख़बरें तूझे मालूम है


तू तो मौसम है, तू तो मौसम है 


राहुल उपाध्याय । 30 अगस्त 2020 । सिएटल