Wednesday, September 9, 2020

ऐ मेरे दोस्त कहीं और भेज

ऐ मेरे दोस्त कहीं और भेज

फ़ॉरवर्ड से व्हाट्सएप मेरा भर गया

ढूँढ ले अब कोई ग्रुप नया


पक गया झूठे नारों से मैं 

झूठी आशा-ओ-वादों से मैं 

इन वीडियों से क्या फ़ायदा

जिसमें दिल की कली जल गई

ज़ख़्म फिर से हरा हो गया


चार आँसू कोई रो दिया

गीत कोई किसी ने गा दिया

लुट रहा था किसी का जहां

देखती रह गई भीड़ जमी

बन गया बेरहम वीडियो


(शैलेंद्र से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2020 । सिएटल

https://youtu.be/rOdQoLYkpYA 


Sunday, September 6, 2020

मत आ प्रिये

मत आ प्रिये कि फिर ये हसीं रात हो न हो

शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो


हमको मिली हैं आज ये घड़ियाँ ज़ूम पे

जी भर के देख लीजिये हमको दूर से

फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो


दूर रहिए वरना हम हो जाएँगे बीमार

बुखार में तड़प के हम रोए ज़ार-ज़ार

आँखों में फिर ये प्यार के जज़्बात हो न हो


(राजा मेहंदी अली खान से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2020 । सिएटल

https://youtu.be/JdLD3fCMVQA 


Saturday, September 5, 2020

इतवारी पहेली: 2020/09/06

इतवारी पहेली:

जो पड़े थे तेरे-मेरे ## ## #
कोई पढ़ लेता तो था ### ##

दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 

जैसे कि:

हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की

ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 

राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2020 । सिएटल
हल: ख़त राह में/ख़तरा हमें 

Thursday, September 3, 2020

जब तक न हो सूरज का साथ

जब तक न हो सूरज का साथ

क्या तब तक न कहूँ मैं अपनी बात?


अंधों के बीच काणा हूँ मैं 

आता हूँ काम, हो दिन या रात 


कुछ समझ रहे, कुछ बिगड़ रहे

मेरे विकास में है सबका साथ 


अकेला चना ना भाड़ फोड़े सही

वट वृक्ष को देता बीज लाखों पात 


इस उम्र में क्या होऊँ हताश 

है हर दिन नेमत, हर दिन सौग़ात 


राहुल उपाध्याय । 3 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Wednesday, September 2, 2020

सीमित न करो विस्तार

दो अक्षर के राम हैं

दो अक्षर के जाम

दो अक्षर का नशा है 

दो अक्षर का है काम


दो अक्षर का जीव है 

दो अक्षर की मौत

दो अक्षर की हार है

दो अक्षर की जीत


दो अक्षर का सुख है

दो अक्षर का दुख

दो अक्षर का है रवि

दो अक्षर का शशि


दो अक्षर की हीर है

दो अक्षर की पीर

दो अक्षर की आग है

दो अक्षर का नीर


अक्षर क्षर होते नहीं 

इनसे निर्मित ब्रह्माण्ड 

कहीं दो, कहीं तीन हैं

कहीं चार और पाँच 


अक्षर एक ईकाई है

रचो जो चाहे संसार

ढाई आखर के फेर में 

सीमित न करो विस्तार


राहुल उपाध्याय । 2 सितम्बर 2020 । सिएटल


Tuesday, September 1, 2020

राम रचि राखा

यह सब क्या हो रहा है?


एक राष्ट्रपति

इलाज के लिए

अस्पताल जाता है

और संक्रमित हो जाता है


कैसे?

क्या योद्धाओं से

कोई भूल हुई?


गृहमंत्री

मुख्यमंत्री

महानायक 

सब के सब

संक्रमित


कैसे?

क्या सारी हिदायतें 

कोरी लफ़्फ़ाज़ी हैं?


होइहि सोइ जो राम रचि राखा ...


राहुल उपाध्याय । 1 सितम्बर 2020 । सिएटल


हैं कमल हरे-भरे

हैं कमल हरे-भरे

हैं क़लाम डरे-डरे

ज़रा देखो तो

किस को किस की ख़बर 

इक रात होके निडर

ज़रा सोचो तो


बात कही

गुपचुप ही कही

जब भी कही

कही दबकर 

और इससे बड़ा नहीं 

कोई अपराध 

तू जाने ना


विरोध में है 

जीवन की खुशी

देती है खुशी 

कई ग़म भी

तू मान भी लें 

कभी हार

मैं मानूँ ना


(कैफ़ी आज़मी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2020 । सिएटल

https://www.youtube.com/watch?v=fWt9Dzv2Qo0