Friday, September 25, 2020

कवि ज़ूम ज़ूम करे

https://youtu.be/KLYpp3kliP0


कवि ज़ूम ज़ूम करे

तड़पाए

बक बक बक करे, 

सर खाए 

एक बात कभी अक्कल की 

कवित्त में नज़र न आए


तेरी झोली डारूँ, 

सब गाली हाथ जो आए

तेरे पीछे खोए 

जो घण्टे लौट के न वो आए


जिस धुन को चुना तूने 

उससे सर मैं धुनाऊँ

जिस घड़ी हाथ आया तेरे 

उसे कैसे भुलाऊँ 

और मेरा व्हाट्सेप,

तेरी पोस्ट से भर-भर जाए

ये ऐसी बीमारी, 

कि मैंने नेट लिए कटवाए


(गुलज़ार से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 25 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Thursday, September 24, 2020

भजो राम प्यारे

भजो राम प्यारे 

मिटे रोग सारे

यदि ट्रम्प या मोदी 

कहे लगा के नारे 

कहेंगे सब इनका 

है दिमाग फिरा रे

यही कहे तुलसी

तो लगे संत न्यारे


हमसे बढ़ा शातिर 

है कोई और कहाँ रे 

हर जगह से अपेक्षा 

है अलग सदा से

डॉक्टर से न माँगे 

ग्रहों के उपचार आदि

पंडितों से न माँगे 

किसी दर्द की दवा रे


राहुल उपाध्याय । 24 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Wednesday, September 23, 2020

मदमस्त धुन

चाँद वही

सूरज वही

बादल अलग

प्यास वही


तेरी शाम ढले 

मैं आँख मलूँ

तू सोए

मैं क्या ख़ाक जगूँ


तेरी सुबह हो

मेरी शाम आए

तू दर्पण तके

मुझे आराम आए


तू माँग सजाए

मैं ख़्वाब सजाऊँ 

तेरी नस-नस में 

मैं समा जाऊँ 


तुझे थाम लूँ 

तेरी बाँह धरूँ 

हर लम्हा 

तुझे प्यार करूँ 


तू गुनगुनाए

अल्हड़ हँसे 

श्रृंगार रस के

सारे रंग फीके पड़े


मैं लिखूँ जिसे

तू उसे पढ़े

आँख से आँख 

ऐसे लड़े


तेरी साँस चले

तो मेरी साँस चले

सच नहीं पर

सच आज लगे


हम कब मिले

कुछ याद नहीं 

है सात जनम का

यह साथ नहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2020 । सिएटल 


धन्य कोरोना!

धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न पाँव लागूँ

न पाँव पड़ूँ 

न किसी को सर चढ़ाऊँ 


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न गले लगूँ

न कोई गले पड़े

न किसी का दम घुटे


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न कोई हाथ मिलाए

न किसी के हाथ लगूँ

दो हाथ दूर सब लोग रहे


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न आए कोई

न जाऊँ कहीं 

झूठ बोलूँ-सुनूँ नहीं 


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न कोई उँगली पकड़े

न पहुँचे तक पहुँचे

रूहानी मोहब्बत रूहानी रहे


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Tuesday, September 22, 2020

मैं कहीं कवि न बन जाऊँ

मैं कहीं कवि न बन जाऊँ तेरे प्यार में ऐ कविता


तुझे डी-पी के आईने में मैंने बार-बार देखा

तेरे स्टेटस में देखा तो छलकता प्यार देखा

तेरा टेक्स्ट मैंने देखा तो जिगर के पार देखा


तेरा ब्लॉग है सलोना तेरी पोस्ट में कसक है

तेरे वीडियो में है जादू तेरे बोल में खनक है

तेरी हर अदा मुहब्बत तू यूट्यूब की धनक है


मेरा दिल लुभा रहा है तेरा रूप सादा सादा

ये झुकी-झुकी निगाहें करे प्यार और ज़्यादा 

ये जग ये भाँप लेगा, है यही डर सताता


(हसरत जयपुरी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2020 । सिएटल 

धनक = इन्द्रधनुष 

https://youtu.be/_8V8XYB5YsA 


Monday, September 21, 2020

फ़ेसबुक की तरह

फ़ेसबुक की तरह

हँसता ही रहा हूँ मैं 

कभी इस 'पोज़' में 

कभी उस 'पोज़' में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


मैं देता रहा

ख़ुशख़बरियाँ कई

मेरी बात मेरे

मन ही में रही

यूँही घुट-घुट के

यूँही झूठमूठ में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


कैसे जुड़ गया

कैसे जोड़ा गया

किस-किससे मुझे

फिर जोड़ा गया

कभी इस गुट में 

कभी उस गुट में 

हँसता ही रहा हूँ मैं 


अपनों की सुनूँ 

या कि ग़ैरों की

हर तरफ़ है फ़ौज 

बे-सर-पैरों की

कभी इस तर्क पे

कभी उस तर्क पे

हँसता ही रहा हूँ मैं 


(रवीन्द्र जैन से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 23 जून 2017 । सिएटल

 https://youtu.be/xsR8jn9_Vqk 


Sunday, September 20, 2020

इतवारी पहेली 2020/09/20


इतवारी पहेली:


हालत जो बिगड़ी है भाषण से ## #

क्या सम्हाल लेगा शोले का ## ##


दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 27 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2020 । सिएटल


हल: जया के/जय आके