Sunday, November 12, 2023

सीता

यह तो समझ में आता है कि

कोई अपनी संतान का नाम 

रावण नहीं रखता है 

पर सीता भी नहीं?


क्या ग़लत किया उसने?


राम ने तो छोड़ा ही

हमने भी छोड़ दिया 


यह साबित कर देता है कि

कोई नहीं चाहता कि

उसकी बेटी को 

सीता के पति जैसा पति मिले

सीता के जीवन सा जीवन मिले


राहुल उपाध्याय । 13 नवम्बर 2023 । फ़रीदाबाद 







इतवारी पहेली: 2023/11/12


इतवारी पहेली:


नारियल को दिन भर जब ##

तब जा के निकला कुछ # #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 नवम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 नवम्बर 2023 । सिंगापुर



Friday, November 10, 2023

नींद

पहले नींद आई

फिर सपने आए

मैंने समझा

उसे मारने आए

सपनों को मैंने मार दिया


अब

जब चाहे नींद आ जाती है 

तनिक भी नहीं सकुचाती है

मैं उसका हूँ, वो मेरी है

हम दोनों के बीच नहीं कोई दूजा है


राहुल उपाध्याय । 11 नवम्बर 2023 । फ़रीदाबाद 



Thursday, November 9, 2023

बात अपनी मैं अपनों से कहता नहीं

बात अपनी मैं अपनों से कहता नहीं 

हर किसी को ग़ज़ल में सुनाता रहा

खेल रिश्तों के बंधन का ऐसा कि बस

जान उनसे मैं अपनी छुड़ाता रहा


खो गया जो वो मेरा कहाँ था कभी

साथ जो भी है वो भी रहेगा नहीं 

उम्र के उस पहर में है ये ज़िन्दगी 

कि सच सबका मैं खुद को बताता रहा


आज के इस उजाले पे ना हूँ फ़िदा 

कल के ग़म का भी कोई भोकाल नहीं 

जब से समझा कि जीवन न एक सा सदा

जो भी सीखा उसे मैं भुलाता रहा


चार पद में कहाँ तक बयां मैं करूँ 

किसने कितना मुझे कब सहारा दिया

एक वो भी थी, वो भी थी, वो भी तो थी

रोज़ लिख-लिख के मैं गीत मिटाता रहा


राहुल उपाध्याय । 10 नवम्बर 2023 । दिल्ली 

Monday, November 6, 2023

दर्द मीठे, ख़ुशियाँ नमकीन

दर्द मीठे, ख़ुशियाँ नमकीन 

होती हैं ये माने कौन

घर-घर में है वही प्रणाली 

नई प्रणाली लाए कौन


हम तुम होते एक जैसे

फिर ना कोई चाहत होती

तेरे-मेरे भेद हैं प्यारे 

इनसे प्यारे धागे कौन


जो तुम में है, वो मुझ में है

जो इसमें है, वो उसमें है

समंदर-दरिया-ताल-तलैया

सब में जल है, प्यासे कौन


भीगे-भीगे नैन हैं प्यारे

अधरों की मुस्कानें भी

सबसे मेरा एक सा नाता

अपनों को समझाए कौन 


आते-जाते मौसम प्यारे

उगते-डूबते तारे भी

सबका अपना अस्त-उदय है

उम्र सबकी नापे कौन


राहुल उपाध्याय । 7 नवम्बर 2023 । सिंगापुर 

Sunday, November 5, 2023

सोती हैं तो सपना है

सोती हैं तो सपना है 

जगती हैं तो दुनिया है

आँखों को अवकाश कहाँ 

हर हाल में इनको तकना है


जो दिख रही वो माया है 

जो देख रही वो काया है

नज़रों से परे है जो

उसे ही तो समझना है


झगड़ों की दवा नहीं है

प्यार की किताब नहीं है 

जो हो रहा है होने दो

किसी से ने हमको बचना है 


क्षणभंगुर है ख़ुशी यहाँ पे

क्षणभंगुर है ग़म भी यारो

जो आता है वो जाता है 

किसी में भी न हमें उलझना है


ये दुनिया सीधी-सीधी है

ये जीवन सादा-सादा है

कब समझोगे, कब उबरोगे 

नाहक ना तड़पना है


राहुल उपाध्याय । 6 नवम्बर 2023 । सिंगापुर 



Friday, November 3, 2023

ख़ौफ़ है कि

ख़ौफ़ है कि 

वह कमसीन है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

उसका परिवार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि 

वह सत्तर पार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि 

वह बीमार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

उस पे उधार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

वह बेरोज़गार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

वो दिलदार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

होनी हार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है कि

पड़नी मार है

तो तुम्हें प्यार है नहीं 


ख़ौफ़ है

चूँकि 

तजुर्बों का भार है

जो देते ये उतार हैं

उनकी सीमा ही अपार है


राहुल उपाध्याय । 4 नवम्बर 2023 । सिंगापुर