Saturday, August 22, 2020

जहाँ फ़ॉरवर्ड भी न हो

आ चल के तुझे,

मैं ले के चलूँ

इक ऐसे गगन के तले

जहाँ फ़ॉरवर्ड भी न हो

ईमोजी भी न हो

बस प्यार ही प्यार पले

इक ऐसे गगन के तले


सूरज की पहली किरण से

गुड मॉर्निंग दिमाग न खाए

चंदा की किरण से धुल कर

गुड नाइट न आते जाए

कोई पास बैठे

कोई घर आ के मिले

स्क्रीन पे न कट-पेस्ट चले


जहाँ दूर नज़र दौड़ आए

मोबाइल नज़र न आए

जहाँ रंग बिरंगे पोस्टकार्ड

आशा का संदेसा लाए

हाथों से लिखें

होंठों से चूमें

ख़त आते हो ऐसे भले


(किशोर कुमार से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/nmUcafxkClA


Friday, August 21, 2020

ग़रीब रहा ग़रीब

कहीं पर हवन 

कहीं पर अगन 

संघर्ष जीवन का 

कितना सघन 


कहीं पर फूल 

कहीं पर शूल 

ज़िंदगी का ये 

कैसा उसूल 


कहीं पर पत्थर 

कहीं पर सर 

आज की ख़बर 

और हैं सब बे-ख़बर 


कहीं पर गणेश 

कहीं पर नरेश 

संवेदना का नहीं 

कहीं प्रवेश 


गरीब रहा गरीब 

और उधर 

दुगना पा गया 

इंजीनियर मगर


राहुल उपाध्याय । 21 अगस्त 2020 । सिएटल 


Thursday, August 20, 2020

भर अकेला

भर अकेला , भर अकेला , भर अकेला 

मिलेगा अब काम भर के फ़ार्म अकेला


हज़ारों फ़ार्म ऐसे-वैसे थे तुझको सताते

ये दुखड़े तेरे दिन पर दिन थे बढ़ाते 

है कौन सा वो इंसान यहाँ पे जिस ने दुख ना झेला

भर अकेला , भर अकेला , भर अकेला 

मिलेगा अब काम भर के फ़ार्म अकेला


मिले न कोई काम तो मेरी एक बात मान ले

मिटा वेदना आवेदन की एक पासपोर्ट साध ले

माता धरती को करके पिता आकाश मान ले

पूरा खेल एन-आर-आई का तूने कहाँ है खेला 

भर अकेला , भर अकेला , भर अकेला 

पा ले पासपोर्ट भर के फ़ार्म अकेला


(प्रदीप से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 20 अगस्त 2020 । सिएटल


Wednesday, August 19, 2020

गुनाह मैंने जम के किए

न तूने किए

न मैंने किए 

किए वादे

न पूरे किए 


मोहलत कहाँ

जो छूटे लत मोह की

मोहल्ले में मकाँ 

सबने किए 


गिले इतने कि

क्या कहूँ 

कम किए

जितने किए


लत ग़लत राह की

कोई नहीं 

उलटे-सीधे काम भी

सीधे-सीधे किए


एक न एक दिन

मिलेगा ज़रूर 

गुनाह मैंने

जम के किए


राहुल उपाध्याय । 19 अगस्त 2020 । सिएटल


Tuesday, August 18, 2020

महीन से महीन महीना भी एक भार है

महीन से महीन

महीना भी एक भार है

यह साल उठेगा नहीं 

लगता इस बार है


तिल-तिल कर

गुज़रता वक़्त है

कहने को

जीने के दिन चार हैं


क्या सोम, क्या मंगल

क्या शनि, क्या रवि

हर दिन

होता एक वार है


मूर्ति तो नहीं 

पर मूर्ति सा ही

गर्भगृह में बंद

मेरा कारोबार है


ज्ञान और विवेक की

बारह बज गई है

न जाता है राहुल कहीं 

न आता घर अख़बार है


राहुल उपाध्याय । 18 अगस्त 2020 । सिएटल 


Sunday, August 16, 2020

ब्रेकअप भी कितनी बुरी चीज़ है

ब्रेकअप भी

कितनी बुरी चीज़ है


जो पसन्द आने लगी थी

उससे होने लगती नफ़रत है


किसी को

विविध भारती से

तो किसी को

पीली साड़ी से

किसी को

देवनागरी से

तो किसी को

कविता से

हो रही अब चिढ़ है


सच

कितना भार है

मुझ पर

संस्कृति को बचाए रखने का


राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2020 । सिएटल


Saturday, August 15, 2020

इतवारी पहेली: 2020/08/16

इतवारी पहेली:

जलियाँवाला बाग़ है ऐसा ###
जो याद दिलाता है हादसा ## #

दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 

जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की

ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 23 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 

राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2020 । सिएटल

हल: तबक़ा/तब का