Friday, July 8, 2022

तेरे शहर का नाम भी

तेरे शहर का नाम भी 

मुझे तेरे क़रीब ले आता है 


तेरे शहर का नाम देख

मैं साँसों में तुझको पाता हूँ 


तू इतने क़रीब हो कर भी

मेरी आँखों से कितनी दूर है 


तू मुझे चाहेंगी उम्र भर

यह तय है 


तू कभी मेरी न होगी

यह भी तय है 


तुझे पा के खोने के

दुर्दिन कभी न आएँगे 


तू रहेगी चाँद 

जो 

घटता है 

बढ़ता है

आता है 

जाता है 

और किसी के हाथ न आता है 


तू

नेक है

सुशील है

बदमाश है

जिसे कर्तव्यों का सदा अहसास है 


तू 

नूर है उस जहान की

जहां मेरा कोई निशान नहीं 

फिर भी हमारी पटरी जुड़ी 

इसका मुझे अभिमान है 


तू फूल है

मैं शूल हूँ 

तू पाक है

मैं ख़ाक हूँ 

तभी तो हमारा न मेल है

तभी तो हमारा साथ है


राहुल उपाध्याय । 8 जुलाई 2022 । गौतमपुरा रोड 





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