Saturday, December 17, 2022

तुम हो किसी की बाँह में


तुम हो किसी की बाँह में

मिल गया पैग़ाम 

अब मुझे डर नहीं

जो भी हो अंजाम


मिलता नहीं है प्रेम-प्यार सबको

होता नहीं है ये प्यार सबको

थी मेरी क़िस्मत मिला प्यार तुमसे

करना नहीं है ये इनकार मुझको

तुम मेरा जीवन, तुम ही सहारा

तुमने दीं सुबहें, तुम्हीं से हैं शाम


चाहा है तुमको, रोका नहीं है

जिसे चाहे चाहो, धोखा नहीं है 

है प्यार वो ही आज़ाद जिसमें 

तन-मन सारा, सौदा नहीं है

है प्यार अपना जग से निराला

पी के भी ना हो, ना हो ख़ाली जाम


राहुल उपाध्याय । 18 दिसम्बर 2022 । चेन्नई 






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