Monday, January 16, 2017
अर्थ का अनर्थ
Sunday, January 15, 2017
समन्दर की, बवण्डर की बातों का क्या बुरा मानना
Wednesday, January 11, 2017
Telepathy
मैं वही अख़बार पढ़ता हूँ
जो तुम पढ़ती हो
मैं उसी वक़्त पढ़ता हूँ
जब तुम पढ़ती हो
मैं वही पन्ने पढ़ता हूँ
जो तुम पढ़ती हो
यह सब इसलिए कि
मुझे टेलिपैथी नहीं आती
11 जनवरी 2017
सिएटल | 425-445-0827
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Sunday, January 8, 2017
लहरें जम गईं फ़िज़ा थम गई
Posted by Rahul Upadhyaya at 2:16 PM
आपका क्या कहना है??
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Labels: misc, relationship
Friday, January 6, 2017
जो गाते थे कभी गुणगान मेरे
Thursday, January 5, 2017
समन्दर को मैंने कल एक तमाचा जड़ा था
समन्दर को मैंने
कल एक तमाचा जड़ा था
हिला था, डुला था, काँपा भी थरथर
पर लाँग-टर्म न उस पर कोई असर पड़ा था
समन्दर की बातें
समन्दर ही जाने
मैं तो किनारे
हक्का-बक्का सा खड़ा था
जब भी होता है
पराजय का सामना
सोचता हूँ मैं
नाहक ही लड़ा था
सालाना सालता हूँ
एक फ़ेहरिस्त अपनी
कि कितने किए समझौते
और कितनों पे अड़ा था
करता हूँ नववर्ष का
नव-आशाओं से स्वागत
क्या हुआ जो गतवर्ष
कुछ ज़्यादा ही नकचढ़ा था
5 जनवरी 2017
सिएटल | 425-445-0827
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Sunday, January 1, 2017
बस इतनी सी मेरी प्रार्थना
देने को तो दे ही चुके हैं
सब देनेवाले सुख-समृद्धि तुम्हें
किस बात की है अब कमी तुम्हें
किस बात की है तुम्हें चाह, प्रिये
लोहड़ी-संक्रान्ति-वसन्त पंचमी
होली-राम नवमी-जन्माष्टमी
ऋद्धि-सिद्धि-दीप-दीपोत्सव
हैलोवीन-थैंक्सगिविंग-क्रिसमस ईव
सब सफल हों, सब सहर्ष हों
सबमें रचें-बसें कर्णप्रिय गीत, प्रिये
जब भी चाहो, ख़ुद को पाओ
ख़ुद से ना तुम दूर रहो
मिथ्या-ईर्ष्या-बैरी-शत्रुता
इनकी न कभी कोई छाँह पड़े
बस इतनी सी मेरी प्रार्थना
झोली में नहीं कुछ ख़ास, प्रिये
देने को तो दे ही चुके हैं ...
1 जनवरी 2017
सिएटल | 425-445-0827
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Posted by Rahul Upadhyaya at 5:20 PM
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Labels: greetings
