Saturday, July 9, 2022

करता रहूँगा प्यार वफ़ा

करता रहूँगा प्यार वफ़ा 

तू लाख कर मना

जलती रहेगी लौ ये सदा

तू लाख कर मना


तेरे बग़ैर ज़िन्दगी कोई ज़िन्दगी नहीं 

है प्यार प्यार प्यार कोई बन्दगी नहीं 

झुकेगा ना ये प्यार मेरा


बरसों की बात ना ये जन्मों का साथ है

तू है जहाँ वहाँ मेरी कायनात है

तुझसे ही है ये जाम भरा


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2022 । रकोड़ा



Friday, July 8, 2022

ये आँखें मेरी ग़म की खदान है

ये आँखें मेरी ग़म की खदान है

जब देखो तब रोतीं जाएँ

रोते-रोते बहतीं जाएँ


आतीं-जातीं साँसों से ये

नीर चुराए, नीर बनाए

सपने अपने सिंदूरी ना

नींदों में भी नैन रूलाएँ 

ये आँसू इसके निशान हैं


अब ना हमसे प्यार ये होगा

प्यार से अब प्यार न होगा

प्यार से बढ़ कर दुख ना कोई 

प्यार भरा अब प्यार न होगा

ये शाप है ना कि वरदान है 


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2022 । रतलाम 


तेरे शहर का नाम भी

तेरे शहर का नाम भी 

मुझे तेरे क़रीब ले आता है 


तेरे शहर का नाम देख

मैं साँसों में तुझको पाता हूँ 


तू इतने क़रीब हो कर भी

मेरी आँखों से कितनी दूर है 


तू मुझे चाहेंगी उम्र भर

यह तय है 


तू कभी मेरी न होगी

यह भी तय है 


तुझे पा के खोने के

दुर्दिन कभी न आएँगे 


तू रहेगी चाँद 

जो 

घटता है 

बढ़ता है

आता है 

जाता है 

और किसी के हाथ न आता है 


तू

नेक है

सुशील है

बदमाश है

जिसे कर्तव्यों का सदा अहसास है 


तू 

नूर है उस जहान की

जहां मेरा कोई निशान नहीं 

फिर भी हमारी पटरी जुड़ी 

इसका मुझे अभिमान है 


तू फूल है

मैं शूल हूँ 

तू पाक है

मैं ख़ाक हूँ 

तभी तो हमारा न मेल है

तभी तो हमारा साथ है


राहुल उपाध्याय । 8 जुलाई 2022 । गौतमपुरा रोड 





Wednesday, July 6, 2022

बेक़ाबू मेरे दिल की ज़ुबान है

बेक़ाबू मेरे दिल की ज़ुबान है

ये चल दे तो आग लगा दे

राख बना के रख दे सब कुछ 


जीवन जैसे इक आईना

दोष दिखाए ख़ुद का जो ना

आस-पड़ोस में दुश्मन देखें

रंग किसी का ख़ुद को जंचे ना

हम ही अच्छे, हम ही महान है 


आज का बालक, कल का युवा

सोच रहा है, कल क्या होगा 

देश चलेगा, देश जलेगा

या इतिहास एक रचेगा 

मन ही मन वो करता गुमान है


राहुल उपाध्याय । 7 जुलाई 2022 । बनारस 


बेक़ाबू मेरे दिल की ज़ुबान है

बेक़ाबू मेरे दिल की ज़ुबान है

ये चल दे तो आग लगा दे

राख बना के रख दे सब कुछ 


जीवन जैसे इक आईना

दोष दिखाए ख़ुद का जो ना

आस-पड़ोस में दुश्मन देखें

रंग किसी का ख़ुद को जंचे ना

हम ही अच्छे, हम ही महान है 


आज का बालक, कल का युवा

सोच रहा है, कल क्या होगा 

देश चलेगा, देश जलेगा

या इतिहास एक रचेगा 

मन ही मन वो करता गुमान है


राहुल उपाध्याय । 7 जुलाई 2022 । सिएटल 


शमा

धरती

दूर से ऐसे

खींचती है 

जैसे मेरे बिना

उसे एक पल चैन नहीं 


पास आते ही

अपने आवरण में

जला कर ख़ाक कर देती है 


शमा

नीले रंग की भी होती है 

पता न था


राहुल उपाध्याय । 6 जुलाई 2022 । बनारस 




Sunday, July 3, 2022

ये सदी सुन रही है

ये सदी सुन रही है, ये सदी गा रही है 

राह मेरे जहां की कहाँ जा रही है 


तोड़ के पर्वतों को बुत नए हैं बनाए 

रंग फूलों पे अपने, अपने रंग सजाए

हर तरफ़ एक जैसी हवा छा रही है 


खोट जिनके हैं दिल में, ख़ुदा वो बने हैं

हाथ ख़ंजर हैं जिनके, मसीहा बने हैं 

आस जिनसे थी उनसे क़ज़ा आ रही है 


साथ जिनका था उनसे बहाने मिले हैं 

प्यार की राह खोजी, फ़साने मिले हैं 

ज़िन्दगी ज़िन्दगी से आज शरमा रही है 


राहुल उपाध्याय । 4 जुलाई 2022 । रतलाम 


क़ज़ा = मौत