Thursday, September 7, 2023

न शिकवा है कोई

न शिकवा है कोई 

न कोई गिला है

मुझे जो मिला है 

बहुत ही मिला है


न आया मैं दर पे

कभी कुछ मैं लेने

दुआ तो रही दूर

न लब तक हिला है


मानूँ तुझको दाता

मगर वो नहीं जो

लेकर के सौग़ात 

देता सिला है


तुझे पूजकर के

न कभी कुछ मिला है 

जो भी मिला है

एक सिलसिला है


करूँ पेश तुझको

नज़राना कैसा

जो भी मैं दूँगा 

तुझसे मिला है 


राहुल उपाध्याय । 7 सितम्बर 2023 । सिएटल 



Wednesday, September 6, 2023

हमने तुझको कॉल किया है जितना

हमने तुझको कॉल किया है जितना

कौन करेगा इतना


बच-बचा के कॉल लगाई दिन हो चाहे रात

जग ने जाने क्या-क्या बोला, पर न छोड़ा साथ

तेरे इश्क़ ने मारा मुझको और जिया भी कितना

कौन गिने अब कितना


तेरे-मेरे बीच की दूरी बन न सकी मजबूरी

दूरी से ही प्यार था शायद, दूरी ही थी इक धुरी

दूर से हमको प्यार था लेकिन मिल के हुआ न उतना

तय था हमको लुटना


ट्वीटर छोड़ा, फ़ेसबुक छोड़ा, और तुझको ही ध्याया

तेरी सूरत, तेरी सेल्फ़ी, इनसे ही मन बहलाया 

आज़ादी की वाट लगा के झुकते गए हम जितना

कौन झुकेगा इतना 


राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2023 । सिएटल 



Tuesday, September 5, 2023

किसे हम शहर कहते हैं

न जाने क्या है वो

जिसे हम शहर कहते हैं 

चंद बाशिंदे जहाँ बसर करते हैं 

कहते हैं वहाँ कभी 

फूल खिलते थे

बाग महकते थे

झरने बहते थे


आज भी 

फूल खिलते हैं 

बाग महकते हैं

झरने बहते हैं 

बंद कमरों में

छत की मुँडेरों पे

झाड़फ़ानूस की गलियों में


राहुल उपाध्याय । 5 सितम्बर 2023 । ज़मीं से ऊपर, आसमाँ से नीचे







Monday, September 4, 2023

तन्हाईयों के डर से

तन्हाईयों के डर से

महफ़िल न खोजता हूँ 

अपनों के इस नगर में 

अपनी ही सोचता हूँ


बहता है पैसा इतना

बंधन नहीं है कोई 

पर्यावरण की चिंता 

जमकर के ओढ़ता हूँ 


मुझसे बुरे हैं कितने

अंदाज़ नहीं है मुझको

अच्छे-बुरे सभी में

ख़ुद को मैं देखता हूँ 


धड़कन बढ़ी नहीं है 

पाँव भी हैं ज़मीं पे

फिर भी है इश्क़ मुझको 

उसको मैं बोलता हूँ 


झूठा नहीं हूँ मैं भी

सच्चा नहीं हूँ मैं भी

जो मिल रहा है मुझको

उसको मैं सौंपता हूँ 


राहुल उपाध्याय । 4 सितम्बर 2023 । गाल्वेस्टन




वह मुझे बहुत दुखी करती है

वह मुझे बहुत दुखी करती है 

अपनी बातों से

अपने विचारों से

अपने व्यवहार से

अपने सामाजिक रिश्तों से

अपने उठने-बैठने के तरीक़ों से


बीवी होती तो तलाक़ हो जाता

यहाँ तो ब्रेकअप के सिवा कोई और चारा भी नहीं 


ब्रेकअप भी अजब बला है 

तीन महीने बात न हो 

और एक फ़ोन आ जाए तो

दिल झूम जाता है 

कोयल गीत सुनाती है 

जन्नत उतर आती है


राहुल उपाध्याय । 3 सितम्बर 2023 । जहाज पर


Saturday, September 2, 2023

इतवारी पहेली: 2023/09/03


इतवारी पहेली:


मेरा उनतालीस यूँ आया और यूँ #### गया

उनका तो उनतीस के बाद ## ## गया


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 10 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 3 सितम्बर 2023 । कोज़ूमेल, मैक्सिको 





Re: इतवारी पहेली: 2023/08/27



On Sun, Aug 27, 2023 at 12:12 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चन्द्रयान-विक्रम आदि हैं प्रोडक्ट ### #

हैं सबके, न उस 'रो' के, न ## # #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 3 सितम्बर 2023 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2023 । सिएटल