Thursday, December 15, 2016

ये जो मोदी हैं, ये उनका है नाम


ये जो मोदी हैं, ये उनका है नाम

काले धन का जो, बस लेते हुए नाम
मर जाएं, मिट जाएं, हो जाएं बदनाम
रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार
हम ना करेंगे वार


टूटे अगर सागर नया सागर कोई ले ले

रूठे अगर आई-टी वाले किसी को न छोड़े
रैड पड़ जाए तो क्या हो अंजाम

आँखें किसी से न उलझ जाए मैं डरता हूँ
यारों बैंकों की गली से मैं गुज़रता हूँ
बस दूर ही से कर के सलाम


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

15 दिसम्बर 2016

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Saturday, December 10, 2016

ठण्ड है चारों तरफ़

ठण्ड है चारों तरफ़ 
पर घासफूस पर ज़्यादा ही है
पानी हो जहाँ 
वहाँ बर्फ़ जम जाता ही है

खारा पानी
हो समन्दर का
या आँख का
अथाह है
एक बहता नहीं 
दूसरा बहता जाता है

बरसे बादल, भरे समन्दर 
भरे मन, बरसे आँखें 
कहीं भरना शुभ है, कहीं अशुभ है
बरसना बुरा कहीं, तो कहीं अच्छा है
शब्दावली के शब्दों का
अर्थ उलझता जाता है

ठण्ड-गर्मी आदि जो मौसम हैं
उचित अनुपात में ही रोचक हैं

बर्फ़ पड़े, बच्चे हर्षाए
बर्फ़ जमे, कारें अड़ जाए

उचित अनुपात ही जीवन दर्शन है
जीवन सुख-दुख का संतुलित मिश्रण है

कभी भरा है, कभी खला है
कभी भाया है, कभी खला है

10 दिसम्बर 2016
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Wednesday, December 7, 2016

तुम इतने जो 😊लगा रहे हो


तुम इतने जो 😊लगा रहे हो
क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो
आँखों में नमी, 😂 text में
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो

खुल जाएँगे भेद धीरे-धीरे
नाहक हमें समझा रहे हो

जिन गीतों का सच मर चुका है
तुम क्यूँ उन्हें गाए जा रहे हो

भावनाओं का मेल है ये जीवन
भावनाओं से भागे जा रहे हो

(कैफी आज़मी से क्षमायाचना सहित)
7 दिसम्बर 2016
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Tuesday, December 6, 2016

अपने ही हाथों बुझाता हूँ अपना दीया

अपने ही हाथों 

बुझाता हूँ अपना दीया

लगा के अलार्म

छुपा के सर

ओढ़ के पाबंदियाँ 


मुझे क्या पता

कि वो था आख़री दिन

जल रहा था दीप

जलने ना दिया


आदत के वशीभूत

हम हैं इतने स्वचालित 

कि 'हाऊ आर यू' के जवाब पे

तवज्जो न किया


चलते-फिरते ही

सब कुछ हो जाता है आजकल

न मंडप, न रंगत

कोर्ट में ही विदा हो जाती हैं लड़कियाँ 


मैंने हमेशा कहा

कि तुम थी ग़लत 

चलो दोनों में से एक ने

कुछ तो सही किया


6 दिसम्बर 2016

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Saturday, December 3, 2016

मेरे दिल में भी अब कोई कहाँ रह गया

मेरी आँखों में कोई सोता तो क्या होता?

उसकी जम्हाइयाँ पलकों को जगा देतीं
उसके खर्राटे भौंहों को हिला देते 
उसकी अँगड़ाइयाँ पलकों पे चोट करती

पर सुकून तो होता कि कोई सोता तो है
प्रसव वेदना का तो मुझे अहसास नहीं
गर्भधारण का तो मुझको इल्म होता

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मेरे दिल में भी अब कोई कहाँ रह गया
जबसे देखा है विडियो
बस एक पम्प रह गया

न जाने कितनी
सहेजी थीं बातें 
फ़साने दीवाने
अधबुने से गाने
कोई गुमनाम चेहरा
एक हसीं मुलाक़ात 
किसी कंगन की खनक
किसी पायल की आवाज़
किसी की उन्मुक्त हँसी 
किसी के घूँघट की आड़

सब के सब
यूँ हवा हो गए
बहुत खोजा 
मगर न जाने कहाँ खो गए

ये जो लोग बनाते हैं 
दिल
लाल ल अक्षर सा प्यारा
उन्होंने ही शुरू से सारा खेल बिगाड़ा

पहले ही विडियो दिखाया जो होता
तो आज नहीं होता यूँ बेसहारा
विज्ञान ने दिखा कर मेरे अंदर का सच
मेरे ही अन्तरमन को बड़ी बेदर्दी से मारा

सच पहले से पता हो तो लगता है ठीक
बाद में पता चले तो होता है नुक़सान 

अच्छा ही हुआ चीर के दिल किसी को न दिखाया
वरना नाहक ही झूठा साबित मैं होता
न दिलबर होता, न दिलबर की तस्वीर होती
न ईश्वर होता, न ईश्वर की प्रतिमा ही होती
खून से लथपथ एक लम्प होता
खून में लथपथ एक पम्प होता

मेरे दिल में भी अब कोई कहाँ रह गया
जबसे देखा है विडियो
बस एक पम्प रह गया

3 दिसम्बर 2016
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