होता होगा सूरज में
चाँद से ज्यादा प्रकाश
लेकिन चाँद भी अपना मस्त है
और सूरज से कम नहीं है खास
एक राज़ की बात बताऊँ?
चाँद है निर्भीक
और सूरज है डरपोक
तभी तो रात को कभी बाहर निकलता नहीं है
और चाँद?
अपनी मर्जी का मालिक
अपनी धुन में मस्त
जब मन चाहे उगे
जब चाहे अस्त
न सूरज से डरे
न तारों से डरे
सब के सामने
सर उठा के चले
और कभी कभी तो
ऐसी गोली दे जाए
कि कहीं न दिखे
अरे भई
किसी के बाप के नौकर थोड़े ही है
जो रोज-रोज अपनी सूरत दिखाते फिरे?
सिएटल 425-898-9325
20 अगस्त 2009
Thursday, August 20, 2009
मस्त-मौला चाँद
Posted by Rahul Upadhyaya at 3:51 PM
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Wednesday, August 19, 2009
भारत छोड़ो आंदोलन
गुर्रु विसा
सुरूर भागने का सब पे चढ़ा
है भारत वो आज कहाँ
जो अंग्रेजों से था कभी लड़ा
जहाँ डाल-डाल पे उड़ने को
आतुर बैठी है चिड़िया
वो भारत देश है भैया
जहाँ सत्य, अहिंसा और धरम की
पग-पग उड़ती धज्जियाँ
वो भारत देश है भैया
जहाँ जो भी परिंदा
घर से निकला
लौट के फिर न आया
शौच के ढंग ने
सोच यूँ बदली
परदेस उसको भाया
भुल गया वो अपनी माटी,
अपने बापू-मैया
वो भारत देश है भैया
ये धरती वो
जहाँ ॠषि-मुनि
जपते प्रभु नाम की माला
हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ
जहाँ अन्याय होता देख भी
उनके मुँह पे रहता ताला
जहाँ ईश्वर सबसे पहले खाए,
खाए खीर-सेवईयाँ
वो भारत देश है भैया
जहाँ आसमान से बाते करते,
नेता और सितारें
किसी नगर में, किसी समय पे,
किसी के काम न आते
उल्टा ठूँस-ठूँस वे माल दबाए,
दबाए करोड़ों रुपया
वो भारत देश है भैया
सिएटल 425-898-9325
19 अगस्त 2009
(राजेन्द्र कृष्ण से क्षमायाचना सहित)
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:54 PM
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Labels: India, new, nri, parodies, Rajinder Krishna
Tuesday, August 18, 2009
मोम
जलती है डोर
पिघलता है मोम
धीरे-धीरे इंसां
मरता है रोज़
जो जल चुका
उसे जलाते हैं लोग
कैसे कैसे
नादां है लोग
मौत भी जिसका
इलाज नहीं
पुनर्जन्म है एक
ऐसा रोग
घर बसाना
है एक ऐसा यज्ञ
जीवन जिसमें
हो जाए होम
जो भुल चुका
हर भूल-चूक
इंसां वही
पाता है मोक्ष
कर्मरत रहो
मुझसे कहता है जो
आसन पे बैठ
खुद जपता है ॐ
रोम-रोम में
बस
बस जाए वो
फिर कैसी काशी,
कैसा रोम?
सिएटल 425-898-9325
18 अगस्त 2009
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:47 PM
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Friday, August 14, 2009
5237 वीं जन्माष्टमी?
कितनी अजीब बात है
कि हमें उनका जन्मवर्ष तो ठीक से ज्ञात नहीं
लेकिन उनके जन्म की घड़ी है अच्छी तरह से याद
जबकि उस ज़माने में घड़ी थी ही नहीं
और अब
ग्रीनविच से घड़ी मिलाकर के
वृंदावन के लोग
रात के ठीक बारह बजे
मनाते हैं श्री कृष्ण का
न जाने कौन सा जन्मदिन
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:38 PM
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Tuesday, August 11, 2009
15 अगस्त की याद में
हम थे अलग
इसलिए हुए अलग
या
हुए अलग
इसलिए अब हैं अलग?
'बिग बैंग' के नाद ने हमें
कर दिया जिनसे दूर
कोशिश उनसे मिलने की
हम करते हैं भरपूर
लेकिन पास-पड़ोस में जो रहते हैं
उनसे करें न प्यार
खड़ी हैं कई दीवारें
जिनके बंद पड़े हैं द्वार
छोटी सी इस धरती पर
जब-जब खींची गई रेखाएँ
नए-नए परचम बने हैं
और गढ़ी गई कई गाथाएँ
अब सब खुद को हसीं बताते हैं
और औरों की हँसी उड़ाते हैं
हम ऐसे हैं, हम वैसे हैं
कह-कह के वैमनस्य बढ़ाते हैं
हम सही और तुम गलत
जब राष्ट्र-प्रेम के परिचायक बन जाते हैं
तब इस वाद-विवाद की वादी में
हम सुध-बुध अपनी खोने लगते हैं
और दूर दराज के ग्रहों पर
विवेक खोजने लग जाते हैं
सिएटल,
11 अगस्त 2009
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:51 PM
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Sunday, August 9, 2009
मसला
हर मसला
'मसल' से
मसला नहीं जाता
हो चौखट पे सैलाब
तो उससे लड़ा नहीं जाता
जब से सुना
कि लकीरों में तक़दीर है मेरी
मेरे हाथों से
मेरा हाथ
मला नहीं जाता
समंदर में मंदिर
कहीं छुपा है ज़रूर
बिन जूते उतारे
उसमे उतरा नहीं जाता
जब भी सँवरती हैं,
बहुत बिगड़ती हैं ज़ुल्फ़ें
कहती हैं
क्यों आज़ाद हमें रखा नहीं जाता?
मुझे होती समझ
तो तुम्हें न बताता?
कि कुछ होती हैं बातें
जिन्हें कहा नहीं जाता
सिएटल
9 अगस्त 2009
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:15 PM
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Thursday, August 6, 2009
मय न होती तो क्या होता?
मय न होती तो क्या होता?
नस्ल का मसला बढ़ गया होता
तू-तू मैं-मैं होती रहती
जल्दी खत्म न झगड़ा होता
न साकी होता, न सलीका होता
प्रेम-प्यार का रंग फ़ीका होता
शेर-ओ-शायरी की बात छोड़िए
ग़ालिब तक न पैदा होता
देवदास को हम जान न पाते
नीरज से वंचित रह जाते
रास-रंग का साथ न होता
आदमी बहुत बेसहारा होता
न पीते लोग, न पिलाते लोग
नपे-नपाए रह जाते लोग
मन में कोई आग न होती
अवतरित न कोई मसीहा होता
वे पागल हैं, वे बचकाने हैं
जो मय को बुरा बताते हैं
इक मय ने ही हमें संयम में रखा
वरना बुत साबूत कोई बचा ना होता
मय और माया का साथ पुराना
मय बिना जीवन बेगाना
यह न होती हम न होते
ब्रह्मा ने ब्रह्माण्ड तक रचा ना होता
सिएटल,
6 अगस्त 2009
Posted by Rahul Upadhyaya at 3:30 PM
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