काहे ज़िद कर रही
काहे को पढ़ रही
करके घर के काम
कन्या सोच, सोच, सोच
कन्या सोच, सोच, सोच
ये जग सारा
दिखता प्यारा
देता खूब निचोड़
कन्या सोच, सोच, सोच
कन्या सोच, सोच, सोच
लगा के हल्दी
कर ना गलती
बचा तू अपना नाम
कन्या सोच, सोच, सोच
कन्या सोच, सोच, सोच
तेरा घर नहीं
तेरा दर नहीं
बस हैं तेरे काम
कन्या सोच, सोच, सोच
कन्या सोच, सोच, सोच
कहाँ तू जाएगी
कहाँ बच पाएगी
हर कोई करे शिकार
कन्या सोच, सोच, सोच
कन्या सोच, सोच, सोच
राहुल उपाध्याय । 19 सितंबर 2026 । सिएटल

2 comments:
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 21 सितंबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
वाह
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