इतवारी पहेली:
नीम करौली बाबा के पास सिर्फ़ #%## था
कहते हैं उन बाबाजी में फिर भी न ## ## था
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2026 । सिएटल
Sunday, September 13, 2026
Re: इतवारी पहेली: 2026/09/06
Thursday, September 10, 2026
कभी पेरिस
कभी पेरिस
तो कभी सबरीमाला में
हम बदनाम होते हैं
धर्म के नाम पर
क्यों ऐसे काम होते हैं
कभी चूड़ी
कभी बिंदी
कभी सिन्दूर
मल दिया जाता है
क्या हम
किसी की जागीर हैं
जो हम पे झंडे
गाड़ दिए जाते हैं
वे चौक पे
चौपाल करने जाते हैं
हम क्यों
चौका-बर्तन करने के लिए
छोड़ दिए जाते हैं
वे खाते हैं पहले
सोते हैं पहले
जगते हैं बाद में
हम क्यों हमेशा
पीछे रह जाते हैं
राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2026 । सिएटल
Tuesday, September 8, 2026
स्तुति
यदि आप
किसी से ऐसी बात करें कि
आप कितने शक्तिशाली हैं
आपकी आँखें कितनी सुंदर हैं
आपकी भुजाओं में कितना दम है
आपके कान के तो क्या ही कहने
आपकी गर्दन तो बस देखते ही बनती है
और याद है
आपने उस दुश्मन को कैसे पछाड़ा था? उस बाहुबली को कैसे मारा था?
उस दिन के तो क्या ही कहने
आप अकेले ने दस-दस को गिराया था
तो इसे तलवे चाटना कहा जाएगा
लेकिन यदि ऐसे ही
किसी मूर्ति से बात की जाए
और भाषा
संस्कृत या अवधी हो
तो उसे
स्तुति कहा जाता है
राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:22 AM
आपका क्या कहना है??
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Sunday, September 6, 2026
इतवारी पहेली: 2026/09/06
इतवारी पहेली:
नीम करौली बाबा के पास सिर्फ़ #%## था
कहते हैं उन बाबाजी में फिर भी न ## ## था
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2026 । सिएटल
Friday, September 4, 2026
वफ़ादारी
वफ़ादारी
सभ्यता की निशानी है
या ग़ुलामी की
नहीं जानता
पर इतना ज़रूर है
कि वफ़ादार
एक किरायेदार है
जिसे मकान मालिक
कभी भी निकाल सकता है
किराया बढ़ा सकता है
यहाँ यह मत करो
वहाँ ये मत करो
इतनी बजे बाद यह मत किया करो
50 प्रतिबंध लगा सकता है
कौन तुमसे मिल सकता है
कौन नहीं
सब वह तय करता है
राहुल उपाध्याय । 4 सितम्बर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:33 PM
आपका क्या कहना है??
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Thursday, September 3, 2026
भाषा ये भाई नहीं
मूलियों का मूल्य नहीं
मूंगफली में मूंग नहीं
गांधारी पे गन नहीं
बैंगन पे बैन नहीं
अजवाइन में वाइन नहीं
भाषा ये भाई नहीं
जामुन में जाम नहीं
पाजेब में जेब नहीं
मंथन का मन नहीं
धंधे में धन नहीं
चारपाई में पाई नहीं
भाषा ये भाई नहीं
सैंडल में सैंड नहीं
टिन्डे में टिन नहीं
लौकी में लौ नहीं
भिन्डी भी भिन्न नहीं
टाइटल में टाई नहीं
भाषा ये भाई नहीं
ईमान का मान नहीं
संतों की संतान नहीं
संतान भी संत नहीं
फ़र्ज़ी के फ़र्ज़ नहीं
ए-आई में आई नहीं
रोकड़ा न कभी रुके
दीपक से कुछ न पके
समोसा न मौसा दे
नाना न ना कहे
(समधन की नाक है)
ए-आई में आय नहीं
पर्दे के पर नहीं
सर्दी में सर नहीं
अरबी में अरब नहीं
चीनी, पर चीनी नहीं
वायलेंस में वाई नहीं
घासलेट में घास नहीं
चौके में चौक नहीं
शक्कर पे शक नहीं
बाइक पे बाई नहीं
वायरस में वाई नहीं
राहुल उपाध्याय । 3 सितंबर 2026 । सिएटल
जाने वो कैसे लोग थे
जाने वो कैसे लोग थे
जिनका ए-आई से काम बना
हमने तो जब करने को बोला
"नहीं कर सकता" ये कहा
इसको ही जीना कहते हैं
तो यूं ही जी लेंगे
सच ना कहेंगे
कूल-ऐड पी लेंगे
झूठ से अब घबराना कैसा?
झूठ सौ बार सुना
बिगड़ गया मेरा सारा बजट
टोकन ले-ले के
कोई तो हो जो मेरी सुन ले
और कुछ काम करे
फेबल-शेबल कुछ काम ना आए
ऐजेंट निष्प्राण पड़ा
जैसे-जैसे दिन बढ़ जाए
मेरी आस घटे
कभी कुछ कह दे
कभी कुछ सुन ले
सत्यानाश करे
इस रोग का कोई अंत नहीं है
रोग बेजोड़ बड़ा
राहुल उपाध्याय । 2 सितंबर 2026 । सिएटल
