Wednesday, August 20, 2014

के-जी से कॉलेज तक


13 साल के अंतराल में
बच्चे कितने स्वतंत्र हो गए
और हम कितने आसक्त
सूना-सूना घर है
सूनी-सूनी कार
आते-जाते राह में
लगे फूल भी रिक्त

हर वक़्त का एक रंग है
हर वक़्त का एक स्वाद
आज अगर हम उदास है
तो कल होगा उन्माद

पलक झपकते ही गुज़र जाएंगे
चार साल अकस्मात
गूँजेंगे फिर कहकहे
होगा फिर हर्ष-उल्लास

मानव-जीवन की विसंगतियाँ ही
मानव का सौभाग्य
माया-मोह से जो वंचित है
वो क्या जाने प्यार

20 अगस्त 2014
सिएटल । 513-341-6798

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के-जी=kindergarten

Wednesday, August 6, 2014

सब साफ़ नज़र आता है

वो चाँद था या बादल
कुछ समझ नहीं पाया मैं



दिन के उजाले में
अक्सर ऐसा धोखा हो जाता है



रात के अँधेरे में
सब साफ़ नज़र आता है



कौन देता है रोशनी
कौन दिलासा मन को
और कौन हवा के साथ
अपना रुख बदल लेता है



सब साफ़ नज़र आता है

6 अगस्त 2014
सिएटल | 513-341-6798

Friday, August 1, 2014

ये अगस्त है, अगस्त है

ये अगस्त है, अगस्त है
चढ़ती राखी जिसमें हस्त है
मटकी होती ध्वस्त है
दुश्मन हुए पस्त हैं

और एक हम हैं कि
फ़ेसबुक पर व्यस्त हैं
बहनों को भाई का पता भी
पता नहीं दुरुस्त है
दीवार पे ही
फ़ोटो-वोटो शेयर कर के
हो रही आश्वस्त हैं

कामकाजी दुनिया ने
जन्माष्टमी का पर्व भी
कर दिया निरस्त है

15 अगस्त - 26 जनवरी
सब एक ही तो बात है
स्वतन्त्रता दिवस - गणतन्त्र दिवस
सब हो रहे गड्ड-मड्ड हैं

ये अगस्त है, अगस्त है
महीना बड़ा मस्त है
कुछ बुढ़े खूसट लोग ही
पुरानी बाते याद कर के
हो रहे फ़्रुस्त हैं

1 अगस्त 2014
सिएटल । 513-341-6798

Monday, July 28, 2014

दूध तो सांप पीते हैं

पहले दारू-सिगरेट पीना बुरा माना जाता था
आजकल दूध पीने पर भी रोक है
कभी-कभी तो लगता है कि
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं एक 'जोक' है

कोई भी चैन से नहीं रहने देता है
एक जीवन और हज़ार झंझट
यह मत करो, वह मत करो
दूध मत पियो
तेल मत खाओ

और तो और अपना जन्मदिन भी नहीं मना सकते
मना लें तो 'केक' नहीं ला सकते
'केक' ले भी आए तो फोटो नहीं खींच सकते
फोटो खींच भी ले तो फ़ेसबुक पर शेयर नहीं कर सकते
वर्ना हज़ार ताने सुनने पड़ेंगे
आपके 'केक' की वजह से देखिए
गायों की क्या हालत हो गई है
ज़मीन तक थन लटक रहे हैं
डेरी वाले 24/7 मशीन से दूध चूस रहे हैं
और आप हैं के ऐश कर रहे हैं?
कोई शर्म-लाज भी है या नहीं?

एक जीवन और हज़ार झंझट

कोई सांस लेना सीखा रहा है
तो कोई जीवन जीना एक कला बता रहा है
कोई धर्म की आड़ में तो
कोई सेहत के नाम पर
देह के साथ खिलवाड़ कर रहा है

अरे भई
जो जैसे जीता है उसे जीने दो
जिसने उसे बनाया है
बहुत सोच-समझ के बनाया है
उसे जो कहना-करना था
वो सब का सब डी-एन-ए में लिखा जा चुका है
आप को उसे पुन: परिभाषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है

धन्यवाद!

सिएटल । 513-341-6798
28 जुलाई 2014

Thursday, July 24, 2014

bug है cloud में

पत्ते झड़ रहे हैं
तापमान गिर रहा है
स्वेटर जो पैक थे
निकलने लगे हैं
ये बे-वक़्त की सर्दी
शायद रास्ता भूल गई है
जाना था सिडनी
सिएटल पहुँच गई है


इससे पहले कि मैं दरवाज़ा जड़ूँ
बिन बुलाए अतिथि का अपमान करूँ

कोई है कहीं तो
इसकी GPS सही कराओ
कोई App-वैप हो तो उसे
download कराओ
और 'गर bug है cloud में
तो Dev को बुलाओ
जिसने बनाया
उसी से fix कराओ

24 जुलाई 2014
सिएटल । 513-341-6798

Sunday, July 20, 2014

हैं पश्चिम के इतने दीवाने

हम दीप जलाते थे
अब कैंडल बुझाते हैं
हैं पश्चिम के इतने दीवाने
कि सूर्योदय नहीं, सूर्यास्त सुहाते हैं

पहले गाते थे, बजाते थे
ढोल-नगाड़े, करताल-मंजीरे
कहीं न कहीं सुनाई दे जाते थे
और अब?
कान में लगे दो तार
लगातार बड़बड़ाते हैं

पहले पैदल जाते थे
पैदल आते थे
बोझा-सौदा भी साथ ले आते थे
और अब?
मशीनी जीवन में
मशीनें इतनी हावी हैं कि
कार से जाते हैं
कार से आते हैं
और बेकार में तोंद बढ़ाते हैं
और फिर उसी तोंद को कम करने के चक्कर में
मशीन पर चढ़ जाते हैं
उस पर लगी 4 फ़ीट की पट्टी पर
बेतहाशा दौड़ते जाते हैं
न कहीं आते हैं
न कहीं जाते हैं
वहीं के वहीं रह जाते हैं
और वातानूकुलित कमरे में
पसीने बहाने के सपने सजाते हैं

20 जुलाई 2014
सिएटल । 513-341-6798

Wednesday, July 16, 2014

Middle East में खून-खराबा और Goetze का गोल

ज़िंदगी हसीन हो
पर इतनी भी नहीं
कि तुम रोओ
और मैं हँसूँ
बम फटे
और मैं नाचूँ

कितना आसां है
चैनल बदल कर
मूड बदल लेना

ज़िंदगी हसीन हो
पर इतनी भी नहीं
कि मेरे रिमोट के हाथों में
मेरी ज़िंदगी हो

16 जुलाई 2014
सिएटल । 513-341-6798