और हम कितने आसक्त
सूना-सूना घर है
सूनी-सूनी कार
आते-जाते राह में
लगे फूल भी रिक्त
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:26 PM
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Labels: relationship
वो चाँद था या बादल
कुछ समझ नहीं पाया मैं
दिन के उजाले में
अक्सर ऐसा धोखा हो जाता है
रात के अँधेरे में
सब साफ़ नज़र आता है
कौन देता है रोशनी
कौन दिलासा मन को
और कौन हवा के साथ
अपना रुख बदल लेता है
सब साफ़ नज़र आता है
6 अगस्त 2014
सिएटल | 513-341-6798
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:22 PM
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Posted by Rahul Upadhyaya at 11:30 PM
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Labels: misc
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:50 AM
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Labels: misc
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:27 AM
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Labels: nature
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:18 PM
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Labels: misc
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:48 AM
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