Sunday, September 20, 2015
जीत गए तो डरना क्या
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:05 AM
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Thursday, September 3, 2015
अब कहाँ किसमे इतना सब्र है
अब कहाँ किसमे इतना सब्र है
कि दो दिन इंतज़ार करे
और गर्म राख में हाथ खराब करे
बस बटन दबाया
और एक ठंडा कलश हाथ आ जाता है
और आप अमेज़ॉन प्राईम के मेम्बर हैं
तो फिर वो दिन दूर नहीं
जब डेश के बटन को दबाते ही
हज़ारों मील दूर पड़ा पार्थिव शरीर
मिनटों में राख हो जाएगा
न टिकट खरीदने की झंझट
न प्लेन में चढ़ने के लिए एक लम्बी उबाउ कतार
न एम्स्टर्डम के सुरक्षाकर्मी को रटे-रटाए सवालों के जवाब देना
न आधी रात घर पहुँचना
और बढ़ती गर्मी और घटते परिवार
के बीच मन ही मन यह समझ आना कि
अब तुम बड़े हो गए हो
घर आए छोटे बच्चे नहीं हो
कि मन-माफ़िक़ खाना बनेगा
पिकनिक की बातें होगी
गोलगप्पे खाए जाएगे
और हाँ
जल्दी ही एक ड्रोन सर्विस भी तैयार हो जाएगी
ताकि गंगा भी न जाना पड़े
स्मार्टफोन पर ही बटन दबाया
और उधर अस्थियाँ विसर्जित
पुनश्च:
जो पढ़े-लिखे लोग हैं
उन्हें पर्यावरण की बड़ी चिंता है
मुझ कम पढ़े व्यक्ति की बातों में आकर
आप उनका अनादर न करें
जितना भी वे कर सकते हैं
कर रहे हैं
एक लाश न जलाकर
वैसी ही उनपर
बी-एम-डबल्यू और मर्सीडीज़ चलाने का
बड़ा बोझ है
3 सितम्बर 2015
सिएटल । 425-445-0827
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:43 PM
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Labels: intense
Wednesday, September 2, 2015
चमचों का भक्तों का, सबका कहना है
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:18 PM
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Labels: Anand Bakshi, parodies
Friday, August 28, 2015
निभ
क्योंकि दोनों वहाँ बंधती थी, जहाँ कलाई होती थी
और राखी ... आती है फोन पे
जिसे दो घड़ी देखने के बाद ही
अंगूठे से सरका देते हैं हम
एक बटन दबाते ही हो जाती है अदृश्य
और कहीं स्टोरेज न भर जाए
इस डर से हो जाती है डिलिट
हाथों-हाथ
न उपहार है देने को, न है मुँह में मिठाई
कि बड़े हुए तो सूख गई भावनाओं की बेल?
और उसकी सुरक्षा हेतु करवा-चौथ?
सासू-माँ के पाँव मलो, करो मैरीड-लाईफ़ इंजॉय?
उखड़े-उखड़े से तेवर हैं
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:57 PM
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Labels: festivals
Wednesday, August 26, 2015
राम भरोसे चलता भारत
Thursday, August 20, 2015
सारे जहाँ से अच्छा
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:13 PM
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Sunday, August 16, 2015
प्लेटों में खाते हैं
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:30 PM
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Labels: misc
