Friday, March 28, 2008

भगवान

हम सुबह शाम भगवान को सजा देते हैं
न जाने किस भूल की उसे सज़ा देते हैं

ईश्वर जो कि अजर अमर है
उसे पत्थर में पनाह देते हैं

सब अपनी मनमानी मूरत गढ़ते हैं
उसने हमें बनाया हम उसे बना देते हैं

फ़ुरसत नहीं हैं जिन्हे मिंटों की
मन्दिरों में घंटे लगा देते हैं


मना के मनगढ़ंत जनमदिन और तीज त्योहार
बात बात पर हम अपना हक़ जता देते हैं

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3 comments:

Anonymous said...

Bahut sundar express ki hai yeh thought aapne! Ishwar ko hum pathar mein panah dete hain...

Dinesh said...

Rahul Ji,

Bahut Khoob likha hai.
Bahut kam shabdon mein aapne bahut kuch kah daala hai.
I specially liked the line " Mandiron main ghante laga dete hain" and
" Ham use bana dete hain"

Please keep writing

kochhar said...

aap sailani hain, sahi hai
magar raaste aap se hain aap raaston pe nahin,
baant rahe jo yaaden wo pathar par lakeer hain