Thursday, March 13, 2008

Blogger ज़फ़र

न किसी के blog पर linked हूँ
न किसी की list में favorite हूँ
जो किसी का ध्यान न पा सके
मैं ऐसी chain-mail unread हूँ

न कोई मुझको ping करे
न कोई मुझ से chat करे
दूर दूर मुझ से सब रहे
जैसे मैं virus की threat हूँ

मेरा domain भी मुझसे छीन गया
मेरे ads पर किसी ने न click किया
जो Nigeria से रोज आती है
मैं वो property unclaimed हूँ

कोई blog पढ़ने आए क्यूँ?
कोई comments लिख के जाए क्यूँ?
जो कभी internet से न connect हो
मैं वो एक computer sad हूँ

मेरी emails सारी unread हैं
मेरी posts सारी ignored हैं
जो पैदा होते ही मर गया
मैं ऐसा email thread हूँ

सिएटल,
13 मार्च 2008
(बहादुर शाह ज़फ़र से क्षमा याचना सहित)
[Please, कम से कम आप तो comment देते जाओ! अल्लाह के नाम पर दे दे! भगवान तुम्हे खुश रखे! तुम्हारा DSL connection कभी न टूटे!]

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9 comments:

अनूप शुक्ल said...

दे दिया। कमेंट जी। अब खुश!

Anonymous said...

आप में अपार सम्भावानाये है, आप अपनी प्रतिभा का मात्र कुछ अंश ही काम में ले रहे हैं, ये पैरौडी
भावना प्रधान है ।
सादर, विके

Raviratlami said...

एक और आनंददायी, मजेदार, फ़्यूजन रचना.

The Journey so far said...

bahot khub :)

Anonymous said...

Ha ha ha ha funny funny poem.

SHER SINGH AGRAWAL said...

aapne to meri aap beeti likh dee. Main itni achchi 2 email bhaijta hoon apni lambi list ko; per kya majaal ki koi banda, eikadh ko chhod kar, koi bhi uttar dene ka kasht kare. Keep it up Rahulji; u have talent and God bless you and everyone incuding myself.

sher singh agrawal
Seattle wale

श्री विजय-राज चौहान said...

KARM KARE JA PHAL KI ECHCHHA MAT KAR (GEETA GAYAN)
SO PLZ LIKHTE RAHO COMMENT KI ECHCHHA MAT KARO !

Yogesh said...

sahi hai.

आपका ये अंदाज़ मेरे को अच्छा लगता है, कि किसी गाने की लय पर लिखना

और सब से अच्छी बात ये, के क्षमा याचना सहित है। शुक्रिया इसके लिये।

shobhaa said...

bahut sunder poem.. maja aa gaya