Friday, May 22, 2009

मैं कायर तो नहीं

मैं कायर तो नहीं
मगर जबसे घर छोड़ा मैंने
तबसे मुझमें कायरता आ गई
मैं गद्दार तो नहीं
मगर जबसे घर छोड़ा मैंने
तबसे मुझमें गद्दारी आ गई

डॉलर का नाम मैंने सुना था मगर
डॉलर क्या है ये मुझको नहीं थी ख़बर
मैं तो
चिपका रहा इससे जोंक की तरह
दुम हिलाता रहा
पालतू कुत्तों की तरह
मैं गरीब तो नहीं
मगर जबसे घर छोड़ा मैंने
तबसे मुझमें दीनता आ गई

सोचता हूँ अगर मैं बुरा मानता
हाथ अपने फ़ैला कर न यूँ भागता
घर पे रहता अन्य परिजनों की तरह
दर-दर न भटकता भीखमंगों की तरह
मैं बेशर्म तो नहीं
मगर जबसे घर छोड़ा मैंने
तबसे मुझमें बेशर्मी आ गई

रात-दिन फ़्री के चक्कर में रहता हूँ मैं
चाराने-आठाने के कूपन लिए फ़िरता हूँ मैं
लाईब्रेरी जा के डी-वी-डी लाता हूँ मैं
मंदिर जा के खाना खा आता हूँ मैं
मैं कंजूस तो नहीं
मगर जबसे घर छोड़ा मैंने
तबसे मुझमें कंजूसी आ गई

सिएटल 425-898-9325
22 मई 2009
(
आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)
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डॉलर = dollar; कूपन = coupon; फ़्री = free; लाईब्रेरी = library; डी-वी-डी = DVD

Thursday, May 21, 2009

अडवाणी जी की अडवांस्ड ऐज

अडवाणी जी की अडवांस्ड ऐज
रह गई मलती हाथ
सोनिया गाँधी जीत गई
हिला-हिला कर हाथ

आठ घंटे जो काम करे
और दो मिनट में पूजा-पाठ
ऐसे कर्मरत इंसान को
कभी धर्म सके न बाँट

हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई का
सब का एक ही ख़्वाब
खाने को रोटी मिले
और मिले हाई-इनकम जॉब

आई-पॉड को देखिए
मिटा रहा सारे भेद
पंडित-मौलवी-पादरी
सब को चाहिए एक

बन सके तो बनिए
आई-पॉड के जैसे दो तार
जिन्हें दलित-ब्राह्मण-बनिए
सब खुशी-खुशी करें स्वीकार

सिएटल 425-898-9325
21 मई 2009
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अडवांस्ड ऐज = advanced age
हाई-इनकम जॉब = high-income job
आई-पॉड = iPod

Saturday, May 9, 2009

मैं अपनी माँ से दूर

मैं अपनी माँ से दूर अमेरिका में रहता हूँ
बहुत खुश हूँ यहाँ मैं उससे कहता हूँ

हर हफ़्ते
मैं उसका हाल पूछता हूँ
और अपना हाल सुनाता हूँ

सुनो माँ,
कुछ दिन पहले
हम ग्राँड केन्यन गए थे
कुछ दिन बाद
हम विक्टोरिया-वेन्कूवर जाएगें
दिसम्बर में हम केन्कून गए थे
और जून में माउंट रेनियर जाने का विचार है

देखो न माँ,
ये कितना बड़ा देश है
और यहाँ देखने को कितना कुछ है
चाहे दूर हो या पास
गाड़ी उठाई और पहुँच गए
फोन घुमाया
कम्प्यूटर का बटन दबाया
और प्लेन का टिकट, होटल आदि
सब मिनटों में तैयार है

तुम आओगी न माँ
तो मैं तुम्हे भी सब दिखलाऊँगा

लेकिन
यह सच नहीं बता पाता हूँ कि
20 मील की दूरी पर रहने वालो से
मैं तुम्हें नहीं मिला पाऊँगा
क्यूंकि कहने को तो हैं मेरे दोस्त
लेकिन मैं खुद उनसे कभी-कभार ही मिल पाता हूँ

माँ खुश है कि
मैं यहाँ मंदिर भी जाता हूँ
लेकिन
मैं यह सच कहने का साहस नहीं जुटा पाता हूँ
कि मैं वहाँ पूजा नहीं
सिर्फ़ पेट-पूजा ही कर पाता हूँ

बार बार उसे जताता हूँ कि
मेरे पास एक बड़ा घर है
यार्ड है
लाँन में हरी-हरी घास है
न चिंता है
न फ़िक्र है
हर चीज मेरे पास है
लेकिन
सच नहीं बता पाता हूँ कि
मुझे किसी न किसी कमी का
हर वक्त रहता अहसास है

न काम की है दिक्कत
न ट्रैफ़िक की है झिकझिक
लेकिन हर रात
एक नए कल की
आशंका से घिर जाता हूँ
आधी रात को नींद खुलने पर
घबरा के बैठ जाता हूँ

मैं लिखता हूँ कविताएँ
लोगो को सुनाता हूँ
लेकिन
मैं यह कविता
अपनी माँ को ही नहीं सुना पाता हूँ

लोग हँसते हैं
मैं रोता हूँ

मैं अपनी माँ से दूर अमेरिका में रहता हूँ
बहुत खुश हूँ यहाँ मैं उससे कहता हूँ

Friday, May 8, 2009

मैं जहाँ रहूँ

मैं जहाँ रहूँ, मैं कहीं भी हूँ, ये मेरे साथ है
किसी से कहूँ, मैं जो भी कहूँ, ये सुन लेता हर बात है
कहने को साथ अपने एक दुनिया चलती है
पर खुद के सेल-फोन में उलझी ही रहती है
लिए फोन कान पे, लिए फोन हाथ में …

कहीं तो कोई पत्नी से डर-डर के बात करता है
कहीं तो कोई प्रेयसी से मीठी-मीठी बात कहता है
कहीं पे कोई चिल्ला-चिल्ला के तू-तू मैं-मैं करता है
कहीं पे कोई दबी ऊंगलियों से चुपचाप एस-एम-एस करता है
कहने को साथ अपने …

कहीं तो कोई हर दो मिनट में ई-मेल चेक करता है
कहीं तो कोई हेड-सेट से दिन भर गाने सुनता है
कोई पार्टी में जा के भी ब्लू टूथ से चिपका रहता है
आ कर मेरे घर किसी और से ही बात करता रहता है
कहने को साथ अपने …

सिएटल 425-445-0827
8 मई 2009
(
जावेद अख़्तर से क्षमायाचना सहित)

Monday, May 4, 2009

स्वाइन फ़्लू

शौक से बनाया था हमने चमन में घर
हाथ फूल गए जब पड़ी केंचुओं पे नज़र

एच-वन का टेंशन, एच-वन-एन-वन का डर
ले-ऑफ़ है सर पर, और बिके न घर

कभी सुअर मारे, कभी शेयर गिरे
कदम-कदम पर गाज गिरे

रातो-रात मात दे गया स्वाइन फ़्लू
शिकारी को शिकार कर गया बेआबरू

कर दी है बोलती कुछ इस तरह से बंद
कि रहता है मुँह पे अब सदा पैबंद

हाथ धो के ऐसे पीछे कुछ रोग पड़े
कि हाथ धो-धो के परेशां हैं बच्चे बड़े

वैसे भी मिलने-जुलने से कतराते थे लोग
अब तो हाथ मिलाने से भी घबराते हैं लोग

सिएटल 425-445-0827
4 मई 2009
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स्वाइन फ़्लू = swine flu; एच-वन = H1;
टेंशन = tension; एच-वन-एन-वन = H1N1 ;
ले-ऑफ़ = lay off;

Wednesday, April 29, 2009

प्यार का रंग न बदला

प्यार का रंग न बदला
इज़हार का ढंग न बदला

आँखों में वही खुशबू
होठों पे वही थिरकन
सांसों में वही गर्मी
सीने में वही धड़कन

क्षण-क्षण वही हैं लक्षण
कुछ भी तो नहीं बदला

प्यार का रंग न बदला
इकरार का ढंग न बदला

दबा के दाँतों ऊँगली
ला के गालों पे लाली
अब भी जताती है प्यार
प्यार जताने वाली

प्यार का प्यारा इशारा
अब तक नहीं है बदला

प्यार का रंग न बदला
इंतज़ार का ढंग न बदला

दरवज्जे पे गाड़े अँखियाँ
रस्ता तकती है गोरी
अब भी रातों को जागकर
तारें गिनती है गोरी

पिया मिलन का सपना
आज भी नहीं है बदला

प्यार का रंग न बदला
तकरार का ढंग न बदला

अब भी ताने है कसती
अब भी कुट्टी है करती
नाक पे रख के गुस्सा
पगली अब भी है लड़ती

प्यार का प्यारा झगड़ा
अब भी नहीं है बदला

प्यार का रंग न बदला
संसार का ढंग न बदला

अब भी जलती है दुनिया
अब भी पिटते हैं मजनू
प्यार मिटाने वाले
अब भी मिलते हैं हर सू

प्यार प्यार ही बाँटे
प्यार न लेता बदला

ज़माना जो चाहे कर ले
प्यार न जाए बदला

सिएटल 425-445-0827
29 अप्रैल 2009

Friday, April 24, 2009

शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ

अंतरिक्ष यात्री:
शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ
वरना हर रात अमावस होती
एक महिला का उद्धार तो होता
पर सारे विश्व की त्रासदी होती

एन-आर-आई:
शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ
वरना अपने ध्येय में व्यस्त मैं रहता
पिता के दिवंगत हो जाने पर भी
जा कर उनका दाह-संस्कार न करता

बेरोज़गार:
शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ
वरना 13 साल तक काम न करता
मान के ले-ऑफ़ को वनवास
हाथ पर हाथ धरे ही रहता

अमरीका के राष्ट्रपति:
शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ
वरना दो भाईयों की फ़ूट का लाभ उठाता
दूसरे देश के सैनिक ही खपते
अपने देश का एक इंसान न मरता


पति:
शुक्र करो, मैं अवतार नहीं हूँ
वरना कमाती पत्नी को तलाक मैं देता
आ कर धोबी की बात में यारो
सारी अर्थव्यवस्था का विनाश मैं करता

सिएटल 425-445-0827
24 अप्रैल 2009