Monday, August 1, 2022

जग में तन साथी

जग में तन साथी

दूजा न कोए

मेरे हाथ, मेरे पाँव 

मेरे नैन सब साथी

दूजा न कोए


तन ही है जो सुख दिलाए

तन ही है जो दुख मिटाए

तन से बड़ा ना धन है कोई

तन ही अपना होए 


धन न हो तो निर्धन होए

तन न हो तो निधन होए

तन न हो तो देखे न कोई 

घास न डाले कोए


तन न होता आता कैसे

तन न होता खाता कैसे

तन ही ने तो सब से मिलाया

बिन तन बात न होए


राहुल उपाध्याय । 2 अगस्त 2022 । अयोध्या 

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