Friday, June 23, 2023

अब तुम वो हसीं नहीं हो

अब तुम वो हसीं नहीं हो

जो उतर गई थी दिल में 


मसअलों के झंझट

छल-कपट के जमघट 

घेर रहे हैं तुमको

कर रहे हैं तुमको

बद से और बदतर


अब तुम वो दिलनशी नहीं हो

जो गले लगी थी जम के


ये हादसों की रातें 

ये मनमुटाव की बातें 

कुम्हला रही हैं तुमको

झुलसा रही हैं तुमको

हद से और बढ़कर 


अब तुम वो डॉल नहीं हो

जो हँस पड़ी थी झट से


राहुल उपाध्याय । 23 जून 2023 । रतलाम 





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